कैथल। कभी एक साधारण गृहिणी व शिक्षिका की तरह परिवार और बच्चों की जिम्मेदारियों तक सीमित रहने वाली अमर राविश अब हजारों महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। उनका मानना है कि यदि एक महिला खुद पर विश्वास कर ले, तो वह न केवल अपना जीवन बदल सकती है बल्कि समाज में भी सकारात्मक बदलाव ला सकती है।
वर्ष 2006 में स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के दौरान उन्होंने योग और प्राणायाम को अपनाया। इससे उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से नया आत्मविश्वास मिला। इसी आत्मविश्वास ने उन्हें बाहर निकलकर समाज के बीच काम करने की प्रेरणा दी। बाद में स्वामी रामदेव के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण प्राप्त कर उन्होंने महिलाओं के बीच जागरूकता फैलाने का कार्य शुरू किया।
अमर राविश बताती हैं कि उस समय गांवों और कस्बों में अधिकांश महिलाएं घर से बाहर निकलने में झिझकती थीं। समाज में महिलाओं के सार्वजनिक जीवन में सक्रिय होने को अच्छी नजर से नहीं देखा जाता था। कई बार लोगों की बातें और आलोचनाएं भी सुननी पड़ीं लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। धीरे-धीरे महिलाएं उनके साथ जुड़ती गईं और उनका आत्मविश्वास बढ़ता गया।
आज वे महिला पतंजलि योग समिति की राज्य प्रभारी हैं। उनके प्रयासों से अनगिनत महिलाएं न केवल समाज से जुड़ीं बल्कि आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी आगे बढ़ीं। उनके मार्गदर्शन में प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली अनेक महिलाएं आज स्वयं प्रशिक्षण देकर सम्मानजनक आजीविका कमा रही हैं। कुछ प्रशिक्षित महिलाएं विदेशों तक में अपनी पहचान बना चुकी हैं।
अमर राविश कहती हैं कि किसी भी महिला की सबसे बड़ी ताकत उसका आत्मविश्वास होता है। यदि परिवार का साथ और खुद पर भरोसा हो, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि एक छोटा-सा कदम न केवल अपनी बल्कि हजारों अन्य महिलाओं की जिंदगी में भी बदलाव ला सकता है।
अमर राविश। स्वयं