संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। ठंड का मौसम शुरू होते ही क्षेत्र में रजाई व रुई के गद्दों की मांग बढ़ गई है लेकिन नई तकनीक का शिकार हाथ से रुई पिनाई करने वाले कारीगर बने हैं।
इस पेशे से जुड़े लोगों का कहना है कि कुछ समय पहले तक उनका गुजारा इसी व्यवसाय से चलता था। मात्र सर्दी के तीन माह तक कार्य करके वे पूरे वर्ष का खर्चा इसी से निकाल लेते थे पर समय परिवर्तन की वर्तमान धारा में उनका गुजारा असंभव हो गया है। निरंतर बढ़ती महंगाई के कारण हाथ से पिनाई व भराई करना लगभग समाप्त हो चुका है।
इसके पीछे उनका तर्क यह है कि हाथ से केवल पूरे दिन में ही मात्र तीन या चार रजाई भरी जाती थी जबकि आज मशीनों से काम शुरू होने के कारण यह व्यवसाय भी एक उद्योग बन गया है जिसे कुछ पूंजी की लागत से प्रारंभ किया जा सकता है। अगर यह कहा जाए कि हाथ पिनाई व भराई करने वाले व्यवसाय के युग का अब अंत हो चुका है तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नही होगी। नई तकनीक में बिजली व डीजल इंजन से चलने वाली मशीनों से यह काम किया जाता है।
उत्तर प्रदेश से कलायत आकर इस व्यवसाय में नई तकनीक तथा मशीनों का उपयोग कर रहे नसीम व उसके साथियों का कहना है कि वे अक्तूबर से फरवरी के आखिर तक कलायत में हर वर्ष लगातार आ रहे है। उनका कहना है कि वे यहां पर चार माह तक पिनाई व भराई का काम इंजन से चलने वाली मशीन से करते हैं जिससे उनके परिवारों का भरण पोषण आसानी से चलता है। हाथ से रुई पिनाई व निवाई करने वाले पूरा दिन में 3 से 4 रजाई ही पूर्ण कर पाते थे जब से उन्होंने इस कार्य में मशीनों का सहारा लिया है तब से काम बढ़ गया है।
ग्राम स्तर पर इस पेशे से जुड़े रामभूल, भीरा राम व जैना का कहना है कि वे अब इस असमंजस में है कि वक्त की बदली धारा के साथ वे क्या करें। उनके समुदाय के अधिकांश लोग व्यवसाय परिवर्तन कर चुके हैं। उन्हें भी कुछ और करना होगा।