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प्रत्येक क्षेत्र में श्रीमद्भगवद्गीता का विशेष महत्व : स्वामी ज्ञानानंद

Wed, 30 Apr 2025 12:42 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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संवाद न्यूज़ एजेंसी
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ढांड। बाबू अनंत राम जनता कालेज कौल में उच्चतर शिक्षा निदेशालय के सौजन्य से श्रीमद्भागवत गीता एवं योग विषय पर एक दिवसीय अंतर्वैषयिकी राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने शिरकत करते हुए कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता का जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में विशेष महत्व है।

उपस्थित श्रोताओं को संबोधित करते हुए स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने श्रीमद्भागवत गीता के विभिन्न आयामों पर प्रकाश भी डाला। उन्होंने कहा कि चाहे शिक्षा हो या व्यवसाय, प्रबंधन हो या व्यक्तिगत जीवन, गीता के सिद्धांत हर क्षेत्र में मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि जीवन में मूल्य और आदर्शों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। ये न केवल एक व्यक्ति के चरित्र का निर्माण करते हैं,बल्कि समाज में भी सकारात्मक परिवर्तन लाते हैं। उन्होंने गीता के कर्मयोग को समझाते हुए कहा कि वर्तमान में जीते हुए अपने कर्म करना ही असली कर्म सूत्र है।
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उन्होंने गीता के कर्मयोग और भक्ति योग को विस्तार से बताया। इससे पूर्व प्राचार्य डा. ऋषिपाल के मार्गदर्शन में संगोष्ठी की अध्यक्षता प्रबंधन समिति के प्रधान चौधरी तेजवीर सिंह ने की। संगोष्ठी का शुभारंभ स्व: ईश्वर सिंह की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर मां सरस्वती वंदना एवं दीप प्रबोधन से किया। कार्यक्रम के अंत में प्रबंधन समिति के प्रधान तेजवीर सिंह ने मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज को वस्त्र भेंट कर सम्मानित किया।

प्रथम तकनीकी सत्र के बीजवक्ता प्रो.अरविंद मलिक शारीरिक शिक्षा विभाग कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय कुरुक्षेत्र ने छात्र-छात्राओं को बताया कि विद्यार्थी जितना विद्या में ध्यान लगाएंगे,उतना ही उनका ध्यान खेलों की तरफ भी बढ़ेगा। क्योंकि खेल और विद्या एक दूसरे की कड़ी है। विद्यार्थी विद्या से जितना ज्ञान हासिल कर सकता है, उतना ही खेलों से वह स्वयं को स्वस्थ बना सकता है। इसके लिए ध्यान एवं एकाग्रता जरूरी है।

मुख्य वक्ता डाॅ. देवी सिंह सहायक आचार्य गणेश दत्त सनातन धर्म महाविद्यालय चंडीगढ़ ने अपने सारगर्भित संबोधन में कहा कि योग के प्रथम अध्याय में चित्त की पांच अवस्थाओं तथा योग के आठ अंगों का विस्तृत वर्णन किया गया है। जो मानव जीवन को संतुलित व उन्नत बनाने में सहायक हैं।
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विशिष्ट वक्ता के रूप में पंजाबी विश्वविद्यालय पटियाला से आए प्रोफेसर वीरेंद्र कुमार विभागाध्यक्ष संस्कृत पालि एवं प्राकृत विभाग ने गीता में समाहित छात्रोपयोगी सूत्रों की जानकारी दी।
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