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निजी प्रकाशकों व उनके एजेंटों से समझौते कर कई निजी स्कूलों के संचालक कर रहे अवैध वसूली

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कैथल। दाखिले के समय कई निजी स्कूल संचालक पुस्तक विक्रेताओं के माध्यम से अभिभावकों से मोटी वसूली में जुट गए हैं। कई स्कूलों में एनसीईआरटी के बजाय निजी प्रकाशकों की पुस्तकें चलवाई जा रही हैं। इन पुस्तकों पर 40 से 60 प्रतिशत तक कमीशन वसूला जा रहा है। एक निजी स्कूल संचालक ने नाम न छापने की शर्त पर यह खुलासा किया है। दूसरी ओर शिक्षा विभाग ने पुस्तकों सहित अन्य शैक्षणिक सामग्री और यूनिफार्म में कमीशनखोरी की सूचनाओं के बीच बीईओ को पत्र जारी किया है। इसमें शिकायत मिलने पर ऐसे स्कूल संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की बात कही है।
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अधिकारियों के पास कमीशनखोरी करने वाले स्कूलों और विक्रेताओं की सूचनाएं पहुंची हैं। पता चला है कि किताबों में 40 से 60 प्रतिशत तक की कमीशनखोरी की जा रही है। यह रकम विभिन्न कक्षाओं में पढ़ रहे विद्यार्थियों से वसूली जा रही है। एक निजी स्कूल संचालक ने बताया कि निजी पुस्तक प्रकाशकों के एजेंट उनसे मिलने के लिए स्कूल में आए और कमीशन से मुनाफा देने की बात कही। कई स्कूल संचालकों ने पुस्तक और यूनिफार्म विक्रेताओं के साथ गुप्त समझौते पर हामी भी भरी है लेकिन उन्होंने ऐसा करने से मना कर दिया। बताया कि एक-एक विक्रेता कई स्कूलों की वर्दियां और पुस्तकें बेच रहा है।
मोटा मुनाफा देने वाले विक्रेताओं के समझौते ही होते हैं सफल
निजी स्कूल संचालक ने यह भी बताया कि कुछ स्कूल खुद बच्चों से वसूली कर ही रहे हैं। साथ ही अभिभावकों को विक्रेताओं और उनके एजेंटों की भी जेबें भरनी पड़ रही हैं। जो विक्रेता मोटे मुनाफे का लालच देते हैं, उन्हीं के समझौते सफल होते हैं। हालांकि इस बार स्कूलों में विक्रेताओं के स्टॉल तो नहीं लगे हैं लेकिन अंदरखाने अब भी कई स्कूल बीते वर्षों से इस प्रक्रिया को दोहराते आ रहे हैं।
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मजबूरी में शिकायत नहीं कर रहे अभिभावक
उधर, अभिभावकों का कहना है कि यदि वे अकेले इस संबंध में शिकायत देते हैं तो पूरे स्कूल में उनका बच्चा प्वाइंट आउट होगा। इसलिए मजबूरन वे वही कीमत देने के लिए विवश हैं जो पुस्तक विक्रेता उनसे मांग रहे हैं।
अभिभावक एसोसिएशन के सचिव गुरमीत गुलाटी ने कहा कि शिक्षा विभाग ने मुख्यालय को पत्र लिखकर एनसीईआरटी की पुस्तकें लगवाने की मांग की थी। इस पत्र के बाद सभी शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं कि एनसीईआरटी की पुस्तकें लागू की जाएं लेकिन स्थानीय स्तर पर कई स्कूलों में एनसीईआरटी की पुस्तकें लागू नहीं करवाई जा रही हैं। अभिभावकोंसे निजी प्रकाशकों की पुस्तकों के लिए मोटी वसूली हो रही है। जिसके विरोध में हाईकोर्ट में याचिका दायर की जाएगी।
डीईईओ ने खंड शिक्षा अधिकारियों को जारी आदेश में कहा है कि वे अपने अधीन आने वाले सभी निजी विद्यालयों को आदेश दें कि कोई भी विद्यालय बैग, स्टेशनरी और किताबें बच्चों को मनमाने तरीके से उपलब्ध नहीं करवाएगा। अगर कोई विद्यालय ऐसा करते पाया गया तो उसे जुर्माने के साथ विभागीय कार्रवाई भी भुगतना पड़ेगा।
जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी चंद्रकला रापड़िया ने कहा कि पत्र के माध्यम से सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को कड़ा संज्ञान लेने का आदेश दिया गया है। सभी अधिकारी निजी स्कूलों से इन आदेशों का पालन करवाएं।
प्राइवेट स्कूल वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश महासचिव वरुण जैन ने कहा कि स्कूल संचालक नियमों का पालन कर रहे हैं। अभिभावकों पर किसी तरह का दबाव नहीं डाला जाता। यदि कमीशन वसूली के संबंध में कोई बात सामने आती है तो उस स्कूल में भी नियमों का पालन करवाया जाएगा।
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