आज जब आधुनिकता की दौड़ में हर लड़का या लड़की परिवार से आजादी चाहते हैं। ऐसे में गांव सिरटा की सरपंच पार्वती देवी का परिवार पूरे प्रदेश के लिए एक उदाहरण है। परिवार में 30 सदस्यों के लिए एक चूल्हे पर खाना बनता है और सभी एक छत के नीचे मिलजुल कर रह रहे हैं। संयुक्त परिवार का लाभ है कि पूरा परिवार लगातार तरक्की कर रहा है और खुशहाल जीवन जी रहा है।
गांव सिरटा निवासी बशेसरदास पराशर व उनकी पत्नी माया देवी के 6 पुत्र थे। जिनमें रामकुमार, राजकुमार, डॉ. महिंद्र सिंह, सुरेंद्र सिंह, सुखदेव व बुधराम। सभी छह भाइयों का फैसला था कि वे अलग नहीं होंगे। सबसे बड़े पुत्र रामकुमार का स्वर्गवास हो चुका है। इसके बावजूद उनके 5 भाई उनके परिवार के साथ संयुक्त रूप से रह रहे हैं। इस समय उनके परिवार में 30 सदस्य एक ही छत के नीचे रहते हैं। पूरा परिवार कमाई में किसी प्रकार से पीछे नहीं है, बल्कि लगातार तरक्की कर रहा है। पूरे गांव में परिवार का अलग ही रुतबा है।
ये सदस्य हैं परिवार में : इस समय परिवार में सबसे बड़े पुत्र रामकुमार की पत्नी सुनीता, उनकी बेटी बीए अंतिम वर्ष की छात्रा नीलम, दूसरी बेटी कोमल बीएड, पुत्र जयदेव बीए प्रथम वर्ष, दूसरे भाई राजकुमार, उनकी पत्नी सुलोचना, पुत्र खुशी राम (बीटेक), पत्नी पार्वती शर्मा (सरपंच एवं एमएम पास), खुशी राम का बेटा नचिकेत, राजकुमार की बेटी सीमा (बीए), पुत्र कुलदीप (बीए), कुलदीप की पत्नी प्रियंका (एमएससी), कुलदीप का पुत्र लविश, तीसरे नंबर के भाई डॉ. महेंद्र, उनकी पत्नी रामदेवी, बेटा दीपक (यूपीएससी की तैयारी), पुत्री सुषमा (जेबीटी), चौथे भाई सुरेंद्र, उनकी पत्नी बाला देवी, उनका बेटा संदीप (आईलेट्स पास), बेटा सोनू (भारतीय सेना में सैनिक), पांचवें नंबर का भाई सुखदेव (भारतीय सेना में सैनिक), उनकी पत्नी कमलेश, बेटी ऋतु (12वीं), बेटी मनीषा (बीए), बेटा अमनदीप (यूपीएससी की तैयारी), छठे नंबर का भाई बुधराम व उनकी पत्नी बोहती देवी, उनका बेटा रविंद्र (जिलास्तरीय क्रिकेट खिलाड़ी), बेटी नेहा (सातवीं)।
इस तरह से चल रहा है कारोबार : परिवार के कुलदीप ने बताया कि चाचा-भतीजा सुखदेव व सोहन लाल तो आर्मी में हैं। बुधराम व कुलदीप शहर में स्पेयर पार्ट का काम करते हैं। खुशीराम गुड़गांव में इंजीनियर की जॉब करते हैं। राजकुमार व सुरेंद्र कुमार खेतीबाड़ी देखते हैं। कंबाइन सुरेंद्र कुमार चलाते हैं। डॉ. महेंद्र गांव में ही आरएमपी के तहत लोगों का इलाज करते हैं। परिवार के अधिकतर फैसले डॉ. महेंद्र लेते हैं। सभी परिवार के सदस्य उन्हें अपनी कमाई दे देते हैं और उनके फैसलों को मानते हैं। परिवार की बहु पार्वती गांव की सरपंच हैं। बाकी परिवार के बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं और परिवार की औरतें रसोई के काम को संभालने के साथ-साथ रसोई में हाथ बंटाती हैं। करीब 18 भैंसें भी रखी हुई हैं।
एक दिन में लगता है 20 लीटर दूध, महीने में ढाई क्विंटल चीनी : परिवार का खाना एक ही चूल्हे पर बनता है। रोटी बनाने में ज्यादा समय न लगे, इसके लिए बड़े तवे का प्रयोग किया जाता है। जिसमें एक साथ चार से पांच रोटी बनाई जा सकती हैं। राशन का सामान भी इकट्ठा लिया जाता है। एक महीने में ढाई क्विंटल चीनी की खपत होती है। वहीं एक दिन में 20 लीटर दूध की खपत होती है। सब्जी बाहर से खरीदने की जरूरत नहीं रहती। खुद के खेतों में सब्जी का उत्पादन करते हैं। साथ ही दूध के लिए भी घर में ही पशु रखे हुए हैं। 18 भैंसें परिवार के सदस्य खुद काम करके पाल रहे हैं। केवल खेतों से घास लाने के लिए दो सहायक रखे हुए हैं।
औरतों ने पेश की है मिसाल : परिवार में सबसे बड़ी महिला सुनीता से जब पूछा गया कि आज अधिकतर घरों में दो महिलाएं भी एक साथ मुश्किल से रहती हैं। आप इतनी संख्या में एक साथ रहती हैं तो क्या आपका कभी झगड़ा नहीं होता? इस पर उनका जवाब था कि हमारी सास ने हमें अच्छी शिक्षा दी थी। साथ ही उनके माता-पिता की सीख थी कि परिवार में रहना है। उन्हीं की सीख के अनुसार हम आपस में प्रेम प्यार से रहती हैं। रसोई, पशुओं व खेत का काम बांटा हुआ है। यदि किसी में कहासुनी हो जाए तो आपस में ही निपट लेती हैं। घर के आदमियों तक बात नहीं जाती। वे हंसी खुशी परिवार में रह रही हैं तो उन्हें क्या परेशानी है।
एक ही छत के नीचे रहते हैं, आगे के लिए भी एक एकड़ ली है जमीन : इस समय भी पूरा परिवार एक ही छत के नीचे रहता है। भविष्य की जरूरतों के लिए गांव में ही एक एकड़ जमीन खरीदी है। उसमें कुछ इस तरह से घर बनाया गया है कि पूर परिवार आमने-सामने के कमरों में एक ही छत के नीचे रह सके। बीच में लॉन छोड़ा है। इनके बच्चों का भी कहना है कि उनका प्रयास रहेगा कि परिवार की परंपरा को आगे बढ़ाएं।
01-कैथल। हम सब एक हैं.............एकजुटता की मिसाल कायम कर, एक ही छत के नीचे ईक्कठे बैठे हुए गांव सिरटा निवास- फोटो : Kaithal