नए कानून का विरोध हिसार के हांसी में भी देखने को मिला है। इस दौरान 192 निजी बसें अपने रूटों पर नहीं चली। चालकों ने बस स्टैंड परिसर में धरने पर बैठ कर कानून को रद्द करवाने की मांग उठाई। चालकों ने चेतावनी दी कि जब तक कानून वापस नहीं होगा, तब तक विरोध जारी रहेगा। चालको ने बताया कि नए कानून में सड़क हादसा होने पर आरोपी वाहन चालक को दस साल की सजा और पांच लाख रुपये का जुर्माने का प्राविधान है। इसी को लेकर निजी बसों के चालकों ने हड़ताल कर दी।
चालकों ने कहा कि वह रोजाना करीब 400 रुपये कमाते हैं। यदि हादसे में इस तरह का जुर्माना और सजा होगी तो परिवार भुखमरी के कगार पर आ जाएगा। जुर्माने की राशि कहां से देंगे। इसलिए ऐसा कानून न लाया जाए। वहीं, दो दिन पुर्व ट्रक चालकों ने भी नए कानून के विरोध में प्रदर्शन किया था। बस चालकों ने कहा कि नए कानून से चालक आहत हैं।
नारनौल के नांगल चौधरी में लोकसभा में पारित न्याय संहिता बिल के विरोध में सोमवार को शहर में विभिन्न वाहनों के चालकों ने एक रैली निकालकर विरोध प्रकट किया। इसके बाद नांगल चौधरी के अस्थाई बस स्टैंड पर पुतला फूंका। इसके बाद सभी चालक हड़ताल कर मंडी में धरने पर बैठ गए।
बैठक को संबोधित करते हुए चालकों ने कहा कि लोकसभा में पारित न्याय संहिता बिल के लागू होने से देशभर के चालक बर्बाद हो जाएंगे। बिल में यह प्रविधान किया गया है कि यदि चालक से सड़क हादसे में कोई घायल हो जाता है तो उसे अस्पताल पहुंचाना होगा। उन्होंने कहा कि इन हालातों में मजबूरी में उन्हें ड्राइवरी का काम छोड़ना पड़ेगा। जिससे उनके परिवार बर्बाद हो जाएंगे।
इसका खामियाजा वाहन संचालकों को भी भुगतना पड़ेगा। चालकाें ने इसे काला कानून बताते हुए सरकार से अविलंब वापसी की मांग की है। वरना चालक काम छोड़ हड़ताल पर रहेंगे। इससे पूर्व सभी चालकों ने एकत्रित होकर मंडी से निजामपुर सड़क मार्ग व देवनारायण चौक से गुजरते हर समूचे शहर में एक रैली भी निकाली गई।