संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। कड़ाके की ठंड के मौसम में ऊनी कपड़ों की मांग तेजी से बढ़ गई है। बाजार में रेडीमेड स्वेटरों के साथ-साथ अब हाथ से बुने गए स्वेटरों की मांग भी खास तौर पर देखी जा रही है। इसी कड़ी में कैथल के गांव खेड़ी गुलाम अली की रहने वाली प्रीति ने अपनी बुनाई की कला के दम पर न केवल लोगों को गर्म कपड़े उपलब्ध कराए हैं, बल्कि आत्मनिर्भर महिला के रूप में अपनी अलग पहचान भी बनाई है।
प्रीति को बुनाई का शौक बचपन से रहा है। घरेलू जिम्मेदारियों के साथ-साथ उन्होंने इस हुनर को आजीविका का साधन बना लिया। सर्दी का मौसम शुरू होते ही उनके हाथ से बने स्वेटरों की मांग बढ़ जाती है। लोग रेडीमेड कपड़ों की बजाय हाथ से बने स्वेटर इसलिए पसंद कर रहे हैं, क्योंकि इनमें मजबूती, आकर्षक डिजाइन और सटीक फिटिंग मिलती है। इसके अलावा हाथ से बुने स्वेटर अधिक गर्म और टिकाऊ भी माने जाते हैं।
प्रीति महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए अलग-अलग डिजाइन, रंग और पैटर्न में स्वेटर तैयार करती हैं। वह साइज और डिजाइन के अनुसार स्वेटर 400 रुपये से लेकर 1500 रुपये तक में बेच रही हैं। ग्राहक अपनी पसंद के अनुसार डिजाइन और साइज बताते हैं, जिससे उन्हें पूरी संतुष्टि मिलती है।
प्रीति अपने बनाए हुए स्वेटरों को स्थानीय बाजार में बेचकर अच्छी आमदनी अर्जित कर रही हैं। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि परिवार को भी सहारा मिला है। प्रीति का कहना है कि हाथ से बनी चीजों की आज भी बाजार में खास पहचान है। यदि महिलाओं को सही मार्गदर्शन और प्रोत्साहन मिले तो वे घर बैठे स्वरोजगार अपनाकर आत्मनिर्भर बन सकती हैं।
हाथ से बना स्वेटर