संवाद न्यूज एजेंसी
पाई। धान घोटाले ने किसानों की कमर तोड़ दी है और अब इससे होने वाला मुआवजा भी अधर में लटकता नजर आ रहा है। किसानों ने सरकार से मांग की है कि धान घोटाले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और हुए नुकसान की भरपाई या तो सरकार द्वारा की जाए या आढ़तियों और राइस मिल मालिकों से दिलवाई जाए।
भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के राष्ट्रीय सलाहकार अजीत सिंह हाबड़ी ने बताया कि वर्तमान सरकार में किसानों पर संकट के कई पहलू छाए हुए हैं। पहले बौने पौधों की बीमारी ने धान की फसल को प्रभावित किया, फिर बरसात और हल्दी फंगस ने बाकी बची फसल को भी नुकसान पहुँचाया।
उन्होंने बताया कि इस बार धान की पैदावार सामान्य स्तर से केवल 20 से 30 प्रतिशत रही। किसान प्रति एकड़ 70 से 80 हजार रुपए में खेत लेकर धान बोते हैं, जिसमें 30 से 40 हजार रुपए प्रति एकड़ की लागत आती है। लेकिन इस बार उपज मात्र 20 से 30 हजार रुपए प्रति एकड़ रही, जिससे किसानों को करीब 50 से 60 हजार रुपए प्रति एकड़ का भारी नुकसान हुआ। किसानों ने नुकसान को देखते हुए पोर्टल पर मुआवजे की मांग की थी और सरकार से गिरदावरी कर सहायता देने की अपील भी की थी। लेकिन अब स्थिति यह है कि सरकार की प्रणाली में किसानों की उपज का रिकॉर्ड गलत तरीके से दर्ज किया गया है।
अजीत सिंह हाबड़ी ने बताया कि आढ़तियों और राइस मिल मालिकों ने सरकार के पोर्टल का दुरुपयोग कर फर्जी गेट पास जारी करवाए, जिससे रिकॉर्ड में प्रति एकड़ 35 क्विंटल तक उत्पादन दिखाया गया यानी लगभग 90 हजार रुपए की पैदावार। सरकार अब मान रही है कि किसानों को कोई नुकसान नहीं हुआ है।
जबकि वास्तविक स्थिति इसके विपरीत है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि यह पूरा मामला धान घोटाले का है, जिसकी उच्चस्तरीय जांच होना जरूरी है। सरकार को चाहिए कि वास्तविक नुकसान का सत्यापन कर किसानों को तत्काल मुआवजा दिया जाए।