संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल/कलायत। पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। कैथल के गांव देवबन व शेरूखेड़ी तथा कलायत के गांव बात्ता में आयोजित किसान संवाद कार्यक्रमों में पुलिस अधिकारियों ने किसानों को स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि किसी ने पराली जलाई तो उसके खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज की जाएगी और सरकारी योजनाओं के सभी लाभ बंद कर दिए जाएंगे।
देवबन व शेरूखेड़ी में आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि डीएसपी ललित यादव ने कहा कि पराली जलाना न केवल वायु प्रदूषण बढ़ाता है, बल्कि यह मानव, पशु और पर्यावरण सभी के लिए हानिकारक है। उन्होंने कहा कि धान कटाई के बाद खेतों में बचे अवशेषों को आग लगाने से मिट्टी की उर्वरता घटती है और भूमि की गुणवत्ता पर प्रतिकूल असर पड़ता है।
डीएसपी ने किसानों से अपील की कि वे सरकार द्वारा उपलब्ध कस्टम हायरिंग सेंटरों और फसल अवशेष प्रबंधन मशीनरी का अधिकतम उपयोग करें, ताकि पराली को खेत में मिलाकर भूमि की सेहत सुधारी जा सके। उन्होंने स्पष्ट कहा कि पराली जलाना कानूनन अपराध है और पुलिस ऐसे मामलों पर सख्त निगरानी रखे हुए है। डीएसपी ने किसानों से कहा कि वे जिम्मेदार नागरिक बनें और पर्यावरण संरक्षण में सहयोग दें। उन्होंने कहा कि “स्वच्छ हवा और स्वस्थ भविष्य” के लिए हर किसान को अपनी भूमिका निभानी होगी।
पुलिस प्रवक्ता प्रवीण कुमार ने बताया कि जिले में डीएसपी, थाना प्रबंधक और पुलिस टीमें लगातार गांवों में जाकर किसानों को पराली जलाने से होने वाले नुकसान और कानूनी परिणामों के बारे में जागरूक कर रही हैं। यह अभियान लगातार जारी रहेगा। कार्यक्रमों में एसएचओ तितरम राजेंद्र कुमार, थाना प्रभारी सतपाल पोसवाल, तथा किसान राजबीर, राजेंद्र, मनोज, रणधीर, बक्शा और मनबीर मौजूद रहे।