संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। एनसीआर जिलों से नवंबर 2024 में कैथल डिपो लाई गईं 60 पुरानी बसों में से 20 अब तक ठीक नहीं हो पाई हैं। खराब हालत के चलते ये बसें रूटों पर नहीं चलाई जा सकीं। रोडवेज कर्मचारियों में इस स्थिति को लेकर रोष लगातार बढ़ता जा रहा है।
इन जर्जर बसों में बैटरी की समस्या प्रमुख कारण बनी हुई है। बैटरी खराब होने की वजह से ये बसें स्टार्ट नहीं हो पातीं। पिछले साल परिवहन मंत्री अनिल विज ने औचक निरीक्षण के दौरान बस स्टार्ट न होने पर चालक मोनू को निलंबित भी कर दिया था।
डिपो प्रबंधन के अनुसार ये 60 बसें झज्जर, भिवानी, जींद और पलवल से मंगाई गई थीं। इनके स्थान पर कैथल डिपो की 48 बीएस-6 तकनीक की बसें भेजी गई हैं। पुरानी बसों को लंबे रूटों पर नहीं चलाया जाता, क्योंकि चलते समय इनमें कोई न कोई खराबी आ जाती है। ऐसे में अक्सर इन्हें कार्यशाला में खड़ा करना पड़ता है। इस समय औसतन आठ बसें कार्यशाला में मरम्मत के लिए खड़ी रहती हैं।
चालक मोनू ने बताया कि विभाग की ओर से इन बसों की हालत सुधारने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। निरीक्षण के समय बस शुरू न होने पर उन्हें निलंबित कर दिया गया था, जबकि असल समस्या बस की जर्जर हालत थी। यात्रियों की शिकायतें भी लगातार आ रही हैं। कई बसों में सीटें फटी हुई हैं, कहीं शीशे टूटे हुए हैं, तो कुछ बसों में छत और फर्श भी खराब हो चुके हैं।
बीएस-4 तकनीक की बसों में जो भी समस्याएं आती हैं, उन्हें समय-समय पर दूर किया जाता है। ऐसा नहीं है कि ये बसें हर समय कार्यशाला में खड़ी रहती हैं। सभी बसों को लंबे रूटों के बजाय छोटे रूटों पर चलाया जा रहा है। -अनिल चोपड़ा, प्रबंधक, कार्यशाला, कैथल डिपो