रोडवेज विभाग ने बसों की आयु बढ़ाकर 10 से 15 साल कर दी है। जिससे न केवल लोगों को राहत मिलेगी, बल्कि विभाग भी लंबे समय तक बसों को सड़कों पर चला सकेगा। वर्ष 2021 में दिसंबर महीने के अंत तक 30 बसें कंडम होने की कगार पर हैं, लेकिन अब वैधता बढ़ने के बाद इन बसों को भी रूटों पर चलाया जाएगा।
लंबे नई बस बेड़े में शामिल होने के बाद इसकी 10 साल की आयुसीमा निर्धारित थी। लेकिन अब विभाग ने इस नियम में बदलाव किया है। लंबे समय तक डिपो में बसें नहीं शामिल होती थीं। साल दर साल बसों की कमी के कारण रूट प्रभावित होतेे हैं। यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जिले से जींद, कुरुक्षेत्र, गुहला, पूंडरी, नरवाना, करनाल, कलायत सहित कई रूटों पर बसों की संख्या हर माह घटाई जा रही थी। अब बसें ऑन रूट रहने से यात्रियों को आवागमन में कोई समस्या नहीं होगी।
कैथल डिपो में वर्तमान में 109 बसें हैं, इनमें रोडवेज की 86 बसें और 23 बसें किलोमीटर स्कीम के तहत की हैं। वर्ष 2018 तक रोडवेज की बसें आठ साल तक चलने के बाद कंडम घोषित हो जाती थीं और उन्हें रूटों से हटा दिया जाता था। इसके बाद वर्ष 2019 में करीब 10 साल की वैधता कर दी गई थी। अब इन बसों की वैधता को 10 साल से बढ़ाकर 15 साल कर दिया है।
18 सितंबर को आयोजित होने वाली महिला सिपाही की परीक्षा के चलते यात्रियों व परीक्षार्थियों के लिए बसों के अतिरिक्त फेरे बढ़ाए जाएंगे। इसके लिए चालक व परिचालकों की छुट्टियां रद्द की गई हैं।
डिपो महाप्रबंधक अजय गर्ग ने बताया कि 10 साल की वैधता पूरी करने वाली बसों की जांच की जाएगी। जो बसें फिट रहेंगी उन्हीं को रूटों पर अगले पांच साल तक चलाया जाएगा। इससे प्रभावित रूट भी बहाल होंगे और लोगों को राहत मिलेगी।