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नए सत्र के चार माह बाद भी पुस्तकें नहीं, आज से छठी से आठवीं तक के स्कूल भी खुलेंगे

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नए शिक्षा सत्र के चार माह बीतने के बाद अभी तक सरकारी स्कूलों में कक्षा पहली से आठवीं तक दी जाने वाली पुस्तकें अभी तक नहीं दी गई हैं। ऑनलाइन कक्षाओं में विद्यार्थियों ने पुरानी किताबों से काम चला रहे हैं। आज शुक्रवार से कक्षा छठी से आठवीं तक स्कूल भी खुल रहे हैं। ऐसे में विद्यार्थी बिना पुस्तकों के कैसे पढ़ेंगे? विभागीय सूत्रों का कहना है कि अभी तक पुस्तकें प्रकाशित ही नहीं हो पाई हैं।
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गौरतलब है कि शिक्षा विभाग द्वारा 16 जुलाई से 9वीं से 12वीं कक्षा तक के स्कूलों को खोला गया है। अब विभाग छठी से आठवीं तक के स्कूलों को खोलने की तैयारी में है। ऐसे में इन विद्यार्थियों को भी या तो पुरानी पुस्तकों से काम चलाना पड़ेगा या फिर प्राइवेट पब्लिशर्स की पुस्तकों का सहारा लेना पड़ेगा।
पुस्तकों की अनुपलब्धता पर भी स्थिति स्पष्ट नहीं
चार माह में अभी तक स्कूलों में पुस्तकें क्यों नहीं पहुंच पाई हैं, इस पर अधिकारियों को भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। एक अनुमान लगाया जा रहा है कि या तो कोरोना के चलते पुस्तकों को प्रिंट नहीं किया गया या फिर कोरोना संक्रमण के चलते अभी तक स्कूलों में पुस्तकें नहीं भेजी गईं। इस संबंध में विभाग का कोई पत्र भी अधिकारियों के पास नहीं आया है।
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फोटो संख्या-19
अभिभावक विकास कुमार ने बताया कि बच्चों को अभी नई किताबें नहीं मिली हैं। पुरानी में भी कुछ तो मिल गई हैं। कुछ के बिना काम चलाया जा रहा है। इससे बच्चों की पढ़ाई का नुकसान हो रहा है। दूसरा अब कोरोना महामारी के चलते बच्चों के बीमार होने का डर भी उन्हें है, लेकिन सुरक्षा के प्रबंधों के साथ बच्चों को स्कूल में भेजेंगे। इसके लिए बच्चों को समझाया गया है कि वे स्कूल में किस प्रकार रहें और पढ़ाई करें।
फोटो संख्या - 20
अभिभावक पंकज ने कहा कि स्कूल की ओर से बच्चों को पुरानी पुस्तकें दी गई हैं। जिन विषयों की पुस्तकें नहीं मिलीं, वे बाजार से खरीद कर दी गई हैं। घर में रहकर भी बच्चों का ध्यान पढ़ाई से विमुख हो रहा है। ऑनलाइन पढ़ाई भी ज्यादा कारगर नहीं है। ऐसे में अगर स्कूल खुले हैं तो बच्चों को भेजना सही है। स्कूलों में भी कोरोना से बचाव के प्रबंध अच्छे हैं, इसलिए बच्चों को स्कूल भेजेंगे। एक-दूसरे से थोड़ा दूर रहने के बारे में बच्चों को कहा गया है।
जिला शिक्षा अधिकारी बोले-बच्चों को दी गई हैं पुरानी पुस्तकें, नई आते ही तुरंत बच्चों को बांटी जाएंगी
इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी अनिल शर्मा ने कहा कि फिलहाल बच्चों की संख्या स्कूलों में 50 प्रतिशत तक ही रोजाना की है। ऐसे में पर्याप्त पुरानी पुस्तकें बच्चों के पास हैं। जैसे ही नई किताबें आती हैं, वे तुरंत बच्चों को बांटी जाएंगी। ऑनलाइन पढ़ाई के लिए विभाग ने पीडीएफ के जरिये बच्चों ऑनलाइन पुस्तकें भी उपलब्ध करवा रखी हैं। प्राइवेट स्कूल वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश सचिव वरुण जैन ने कहा कि विभाग द्वारा जारी आदेशों की पालना करते हुए स्कूल खोले जाएंगे। स्कूलों में मास्क सहित सभी तरह की तैयारियां की जा रही हैं।
आज कड़े प्रबंधों के बीच शुरू होंगी छठी से आठवीं की कक्षाएं
जिला शिक्षा अधिकारी अनिल शर्मा ने बताया कि 23 जुलाई से कक्षा छठी से आठवीं तक के विद्यार्थियों के स्कूल खुलेंगे। विद्यार्थियों की कक्षाएं लगाने के लिए शिक्षा विभाग द्वारा कड़े प्रबंध किए गए हैं। एक बच्चे को बैठने के लिए रोजाना एक ही बेंच मिलेगी। पानी और खाना बच्चे एक-दूसरे के साथ बांट नहीं सकेंगे। मास्क लगाकर बच्चे कक्षाओं में पहुंचेंगे। सैनिटाइजर उपलब्ध करवाया गया है। स्कूलों में बैठने से लेकर बच्चों के आने और जाने के लिए कोरोना से बचाव के कड़े प्रबंध किए गए हैं।
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