पहले डंपिंग यार्ड में जिस गीले कचरे की बदबू से लोगों का जीना मुहाल हो रहा था, अब नगर परिषद उससे जैविक खाद बनवा रहा है। इससे न सिर्फ लोगों को राहत मिलेगी, बल्कि किसानों के लिए भी जैविक खाद उपलब्ध हो सकेगी, हालांकि किसानों को यह खाद निशुल्क नहीं मिलेगी, बल्कि उन्हें खरीदनी पड़ेगी। इसके लिए परिषद की ओर से एक एजेंसी को ठेका दिया गया था, जिससे खाद बननी शुरू हो गई है।
नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी कुलदीप मलिक ने बताया कि शहर से जो सड़े-गले सेब, अनानास व पत्ते, केले के डंठल, अनार सहित अन्य फल और सब्जियों के वेस्ट मैटेरियल घरों से एकत्रित कर जैविक खाद उत्पादन यूनिट पर लाया जाता है। इसके अलावा नगर परिषद की ओर से शहरी क्षेत्र के वार्डों से भी कचरा एकत्र कर लाया जाता है। इसमें से गीले कचरे को एकत्रित कर जैविक खाद बनाने में प्रयोग किया जा रहा है।
नगर आयुक्त कुलधीर सिंह ने बताया कि शहर में हर दिन निकलने वाले कचरे के निष्पादन को लेकर नगर परिषद काफी गंभीर है। इसके लिए एक एजेंसी को ठेका दिया गया है, जिससे जैविक खाद बनाने की भी शर्त रखी गई थी। इसके तहत अब जैविक खाद भी बनाई जा रही है। इसके लिए कचरा निष्पादन की मशीन लगवाई गई है। वहीं नगर परिषद के कार्यकारी अभियंता हिमांशु लाटका ने बताया कि शहर से करीब 80 टन कचरा प्रतिदिन निकलता है। इनमें से 60 फीसदी गीला एवं 40 फीसदी सूखा कचरा रहता है। गीले कचरे से जैविक खाद तैयार की जा रही है, जबकि सूखे कचरे का अलग से निस्तारण किया जा रहा है।