संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। डीसी प्रीति ने गलत तरीके से अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र बनवाकर सरपंच बनी मुंदडी की सरपंच शशि को उनके पद से हटाया दिया है। उन पर आरोप है कि फर्जी दस्तावेज का सहारा लेकर वह सरपंच बनी थी। पद से हटाने के साथ ही उन्हें पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव लड़ने से छह वर्ष के लिए अयोग्य घोषित किया गया है। आदेशों में कहा गया है कि अब बहुमत वाले पंच को सरपंच का चार्ज दिया जाएगा।
गौरतलब है कि फर्जी प्रमाणपत्र का सहारा लेकर चुनाव लड़ने के आरोप को लेकर शशि के खिलाफ काफी समय से जांच चल रही थी। इसकी जांच का जिम्मा कैथल के अतिरिक्त उपायुक्त को सौंपा गया था।
जिला समाज कल्याण अधिकारी कैथल को हरियाणा सरकार द्वारा 22 मार्च 2022 को जारी पत्र अनुसार शशि पुत्री हरिश्चंद्र निवासी गांव मुंदडी कैथल का अनुसूचित जाति प्रमाणपत्र भेजकर इसकी जांच करवाई गई थी। शशि निवासी दयाल वाला जिला बिजनौर उत्तर प्रदेश जिसकी महेंद्र सिंह जाति रोड निवासी मुंदरी के साथ शादी हुई है।
रिपोर्ट में कहा गया था कि अनुसूचित जाति में जन्म लेने वाले को ही आरक्षण का लाभ दिया जा सकता है। इसे लेकर सरपंच शशि को जिला प्रशासन ने कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। नोटिस के जवाब में उनके द्वारा 28 फरवरी 2025 को अपना जवाब प्रस्तुत किया गया जिस पर जिला प्रशासन द्वारा उनका जवाब संतोषजनक न पाए जाने के कारण उनका निजी सुनवाई का अवसर भी प्रदान किया गया था।
निजी सुनवाई के दौरान सरपंच शशि ने 3 मार्च को उपस्थित होकर कहा था कि उनका जवाब ही उनका बयान समझा जाए। इस पर डीसी प्रीति द्वारा उनके अनुसूचित जाति के प्रमाण पत्र को अयोग्य करार देते हुए हरियाणा पंचायती राज एक्ट 1994 की धारा के तहत उन्हें सरपंच के पद से हटाने के आदेश दिए हैं।
यही नहीं आदेशों में कहा गया है कि शशि आगामी पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव लड़ने से 6 वर्ष के लिए अयोग्य घोषित करार भी दी गई हैं।