कलायत। कभी साइबेरियन पक्षियों की कलरव से गूंजने वाला कपिल मुनि सरोवर पूरी तरह से पक्षी विहीन है। कुछ वर्ष पूर्व तक को हजारों किलोमीटर का सफर तय करके प्रवासी पक्षी नवंबर माह में यहां डेरा डालते थे। नवंबर माह शुरू होते ही प्रवासी पक्षियों का यहां आना शुरू हो जाता था जिन्हें देखने के लिए दूर दूर से लोग पहुंचते थे। समय के साथ न तो तालाब रहे और न ही पक्षी। तालाबों की गंदगी से शायद पक्षियों का मोहभंग हो गया और उन्होंने कलायत के तालाबों से किनारा कर लिया।
पक्षी प्रेमी सुरेश गोयल ने बताया की दस वर्ष पूर्व तक यहां बड़ी संख्या में मुर्गाबी, शैलडक, फ्लेमिंगो, पिंक टेल, रोजी पेलिकन, जांघिल, रफ और साइबेरियन सारस पहुंचते थे। उस समय तक कपिल मुनि सरोवर और उसके पास का पूरा क्षेत्र तालाब ही था। सरोवर से सटे साढ़े छह एकड़ क्षेत्र को पाट कर वहां एक खूबसूरत पार्क बना दिया गया। बाकी बचे करीब 7 एकड़ के कपिल सरोवर में गंदा पानी और किनारे पर वृक्षों ने न होने से प्रवासी पक्षियों का मोह भंग हो गया और उन्होंने कलायत को टाटा कर दिया। पक्षी प्रेमी सुरेश गोयल, रामगोपाल, असीम शर्मा आदी ने बताया की तीन वर्ष पूर्व तक भी कुछ प्रवासी पक्षी कलायत के कपिल सरोवर में पहुंचते रहे हैं पर सरोवर में फैली गंदगी के कारण से उन्होंने भी यहां आना बंद कर दिया। अब हालात ऐसे हैं कि कपिल सरोवर में बहुत ही कम मात्रा में पानी है जिसके चलते एक भी प्रवासी पक्षी कलायत में नहीं पहुंचा। बीरभान निर्मल ने कहा कि कपिल सरोवर के अलावा कलायत में छह और भी बड़े तालाब होते थे जो पानी से लबालब रहते थे। इन तालाबों में भी नवंबर मास से प्रवासी पक्षियों का आगमन शुरू हो जाता था और पूरी सर्दी प्रवासी पक्षियों की कलरव से माहौल गुंजायमान रहता था। समय के साथ साथ तालाबों का दायरा सिकुड़ता गया और अधिकांश तालाब गंदगी का घर बन कर रह गए। इस समय केवल बीबड़ी माता तालाब व ढोबी तालाब में शुद्ध जल है पर पक्षी उनमें भी कोई नहीं आया। बाकी के बचे सभी तालाब जलखुंभी व गंदे दुर्गंधयुक्त पानी से भरे हैं। पक्षी प्रेमियों ने मांग की है कि सरकार तालाबों के पुनरोद्धार की महत्वपूर्ण योजना के तहत कलायत के तालाबों को साफ किया जाए और उनमें शुद्ध जल का भराव करवाया जाए ताकि एक बार फिर से प्रवासी पक्षी कलायत में आना शुरू हों।