05-कैथल। अमरगढ़ गामड़ी स्थर त आंगनबाड़ी केन्द्ी का दृश्य।
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जिले भर में करीब 1200 से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों में एक ओर तो जिला महिला एवं बाल कल्याण अधिकारी द्वारा गांव दर गांव जाकर पोषण सप्ताह मनाया जा रहा है। जिसमें बच्चों व गर्भवती महिलाओं को पोषण की जानकारी देकर स्वास्थ्य बनाए रखने का आह्वान किया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर एक महीने से भी अधिक समय से जिले भर के आंगनबाड़ी केंद्रों में राशन नहीं है। गेहूं व चावल खत्म होने के कारण वर्कर्स को लोगों से राशन मांग कर काम चलाना पड़ रहा है। हालात ये हैं कि अब कई केंद्रों को उधार मिलना भी बंद हो गया है और नौनिहाल बिना मिड डे मील के वापस लौट रहे हैं। अधिकतर सेंटरों में बच्चों ने आना भी बंद कर दिया है।
एक महीने से नहीं है राशन : एक आंगनबाड़ी वर्कर ने बताया कि एक महीने से भी अधिक समय से केंद्रों पर गेहूं व चावल खत्म हो चुका है। शुरू में अधिकारियों ने कहा कि वे दूसरे केंद्रों से उधार लेकर काम चलाएं। इसके बाद कहा गया कि जो मदर ग्रुप खाना बनाने के लिए आते हैं, उन्हें कहा जाए कि वे उधार में राशन दे दें। अब जब वे भी हाथ खड़े कर गईं तो अब समुदाय यानी की समाज से राशन मांग कर काम चलाने को कहा जा रहा है। कई जगहों पर लोगों ने भी राशन देना बंद कर दिया है। जिस कारण अधिकतर केंद्रों से बच्चे बिना कुछ खाए ही वापस लौट रहे हैं। इस समय केंद्रों में चीनी और तेल पड़ा है। लेकिन आटा, गेहूं या चावल नहीं हैं। जिले भर में 1200 से अधिक आंगनबाड़ी केंद्र हैं। जहां हर रोज हजारों बच्चे आते हैं।
फर्जी राशन की इंट्री का डाला जा रहा है दबाव : आंगनबाड़ी वर्कर्स यूनियन की प्रदेश की नेता शकुंतला ने कहा कि एक महीने से भी अधिक समय से राशन खत्म हो रहा है। अधिकारी वर्कर्स पर उधार लेकर राशन बनाने का दबाव डाल रहे हैं। लेकिन वर्कर्स को कहा गया है कि वे फर्जी राशन न चढ़ाएं। जितने दिनों से राशन खत्म हुआ है, उतने दिनों का गैप रजिस्टर में अंकित किया जाएगा। कई केंद्रों पर तो सितंबर 2018 के बाद से तेल तक नहीं पहुंचा है। ऐसे में वर्कर्स पर अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है।
पता कराऊंगी कि ऐसा क्यों है? केंद्रों में शीघ्र ही राशन भिजवाना सुनिश्चित किया जाएगा। जिस भी अधिकारी या कर्मचारी की कमी पाई गई, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई भी की जाएगी।
डॉ. प्रियंका सोनी, डीसी