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Kaithal News: दुर्लभ संयोग के बीच जन्मेंगे प्रभु श्री कृष्ण

Tue, 05 Sep 2023 01:28 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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कैथल। जन्माष्टमी छह सितंबर को मनाई जाएगी। दूसरी ओर वैष्णव संप्रदाय से जुड़े लोग सात सितंबर को श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाएंगे। छह सितंबर को बुधवार के साथ रोहिणी नक्षत्र का संयोग भी बन रहा है। इसी नक्षत्र और दिन को भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था।
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यह जानकारी हनुमान वाटिका स्थित मंदिर के पुजारी पंडित विशाल शर्मा ने दी। उन्होंने बताया कि इस वर्ष जन्माष्टमी पर वर्षों के बाद ऐसा संयोग बना है, जो दुर्लभ है। श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्र कृष्ण अष्टमी तिथि दिन बुधवार, रोहिणी नक्षत्र एवं वृष राशि में मध्य रात्रि में हुआ था। जन्माष्टमी का पर्व हर साल भाद्रपद की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। भाद्रपद की अष्टमी तिथि छह सितंबर को दोपहर तीन बजकर 28 मिनट पर शुरू हो रहा है। वहीं अष्टमी तिथि की समाप्ति अगले दिन सात सितंबर शाम 4 बजकर 15 मिनट पर होगी।

पंडित विशाल शर्मा के अनुसार छह सितंबर को ही जन्माष्टमी का व्रत रखा जाएगा और मध्य रात्रि में हर घर में भगवान श्री कृष्ण जन्म लेंगे। वहीं वैष्णव संप्रदाय से जुड़े लोग सात सितंबर को श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाएंगे।
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यह भी मान्यता है कि जन्माष्टमी पर व्रत रखने से भक्तों के जीवन से सभी कष्ट दूर होते हैं। भगवान श्रीकृष्ण के आशीर्वाद से निसंतान महिलाओं को संतान की प्राप्ति होगी

जन्माष्टमी शुभ मुहूर्त- जन्माष्टमी तिथि सात सितंबर को दोपहर तीन बजकर 37 मिनट से शुरू होगी। अष्टमी तिथि सात सितंबर शाम चार बजकर 14 मिनट पर समाप्त होगी। जन्माष्टमी का शुभ मुहूर्त रात्रि 12 बजकर दो मिनट से लेकर 12 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। इस मुहूर्त में लड्डू गोपाल की पूजा अर्चना की जाती है। इसी मान्यता के अनुसार गृहस्थ जीवन वाले छह सितंबर को जन्मोत्सव मनाएंगे। इस दिन रोहिणी नक्षत्र का संयोग भी बन रहा है। वैष्णव संप्रदाय में सात सितंबर के कृष्ण जन्माष्टमी उत्सव मनाएंगे।

ये है जन्माष्टमी पूजन सामग्री

लड्डू गोपाल की मूर्ति, सिंहासन, रोली, सिंदूर, सुपारी, पान के पत्ते, फूल माला, कमलगट्टे, पीले वस्त्र, केले के पत्ते, कुशा और दूर्वा, पंचमेवा, गंगाजल, शहद, शक्कर, तुलसी के पत्ते, शुद्ध घी, दही, दूध, मौसम के अनुसार फल, इत्र, पंचामृत, पुष्प, कुमकुम, अक्षत, आभूषण, मौली, रुई, तुलसी की माला, हल्दी आदि।

सप्तमृत्तिका, सप्तधान, बाजोट या झूला, नैवेद्य या मिठाई, छोटी इलायची, लौंग, धूपबत्ती, कपूर, केसर, चंदन, माखन, मिश्री, कलश, दीपक, धूप, नारियल, अभिषेक के लिए तांबे या चांदी का पात्र, मोरपंख, बांसुरी, गाय की प्रतिमा, वैजयंती माला, लाल कण्डा, तुलसी के पत्ते, आभूषण, मोट मुकुट, खीरा, गणेशजी को अर्पित करने के लिए वस्त्र, अंबिका को अर्पित करने के लिए वस्त्र।
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