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Kaithal News: कांवड़िये करेंगे अभिषेक, गूंजेगा बम-बम भोले

Wed, 26 Feb 2025 12:32 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल/सीवन। महाशिवरात्रि का पर्व बुधवार को पूरे देश में श्रद्धा व उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस पावन अवसर पर शिवालयों में विशेष तैयारियां की जा रही हैं। इस पर्व पर कांवड़ियों के लिए जलाभिषेक का समय सुबह 11 बजे के बाद शुरू होगा, जो देर रात तक जारी रहेगा। मंदिरों को भव्य रूप से सजाया जा रहा है। शिवालयों में दिनभर हर-हर महादेव के जयकारे गूंजेंगे।

शहर के चंदाना गेट स्थित श्री ग्यारह रुद्री शिव मंदिर में सुबह चार बजे से ही जलाभिषेक शुरू हो जाएगा। इसके साथ ही पर्व को लेकर हनुमान वाटिका के मंदिर परिसर में पांच सात दिवसीय होलात्मक महायज्ञ की भी शुरुआत होगी। इस मौके पर शहर की महिलाओं की ओर से भव्य कलश यात्रा भी निकाली जाएगी। इसके साथ ही ढांड रोड स्थित शिव मंदिर में भी पर्व को लेकर कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
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सीवन के श्री राम मंदिर के पुजारी वीरेंद्र पांडे ने बताया कि इस दिन भगवान शिव की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व होता है। शिवलिंग का जलाभिषेक दुग्धाभिषेक और रुद्राभिषेक किया जाएगा। भव्य आरती के साथ मंदिरों में भजन-कीर्तन का आयोजन होगा। महाशिवरात्रि के दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु व्रत रखते हैं। उन्होंने बताया कि महाशिवरात्रि शिव और शक्ति के मिलन का प्रतीक है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था।

महाशिवरात्रि का पर्व हर वर्ष भक्तों को भक्ति श्रद्धा और आत्मशुद्धि का संदेश देता है। उन्होंने बताया कि यह पर्व केवल धार्मिक आस्था का ही नहीं बल्कि आत्मशुद्धि और आत्म साक्षात्कार का प्रतीक है। भगवान शिव संहार और सृजन दोनों के देवता हैं। उनकी उपासना से नकारात्मकता समाप्त होकर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इस दिन रुद्राभिषेक करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।

महाशिवरात्रि पर रात्रि जागरण और शिव मंत्रों का जाप करने से भक्तों को आध्यात्मिक शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। ममता, वीना, शालिनी, अदिती, अशोक कुमार, संगीत, सुरेश व अन्य उपवास करने वाले भक्तों ने बताया कि इस दिन वे पूरे दिन फलाहार करते हैं और रात्रि में भगवान शिव की विशेष पूजा करके ही उपवास तोड़ते हैं। कई लोग इस दिन जल और दूध का ही सेवन करते हैं। मान्यता है कि इस दिन व्रत करने और भगवान शिव की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। महाशिवरात्रि के दिन भक्तजन शिवलिंग पर जल दूध दही घी शहद और बेलपत्र
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अर्पित किया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इन सामग्रियों से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।
शहर को जाना जाता है छोटी काशी के नाम से
चंदाना गेट स्थित प्राचीन श्री ग्यारह रुद्री शिव मंदिर के कारण इस शहर को छोटी काशी के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि महाभारत युद्ध के बाद भगवान श्रीकृष्ण ने यहां ग्यारह रुद्रों की स्थापना की थी और पांडवों से इनकी पूजा करवाई थी, जिससे युद्ध में मारे गए सैनिकों की आत्मा को शांति मिल सके। तभी से यहां भगवान शिव की पूजा-अर्चना की जाती है। पुजारी पंडित मुनेंद्र मिश्रा ने बताया कि यह भी मान्यता है कि अर्जुन ने महाभारत काल में पाशुपत अस्त्र की प्राप्ति के लिए यहीं भगवान शिव की कठोर तपस्या की थी। भगवान शिव अर्जुन की आराधना से प्रसन्न होकर इसी स्थान पर उन्हें दर्शन दिए थे। तभी से यह स्थान शिव भक्ति का प्रमुख केंद्र बन गया और पूरे देश से श्रद्धालु यहाँ पूजा-अर्चना के लिए आने लगे।
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