कैथल। क्षेत्र के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को तकनीकी शिक्षा के नाम पर प्रशिक्षित करने के लिए सरकार की ओर से करोड़ों रुपये की राशि खर्च किए जाने की जा रही है, लेकिन कहीं शिक्षक और कहीं पाठयक्रम न होने से यह योजना बेसर साबित हो रही है।
कैथल के कई राजकीय स्कूलों के प्रैक्टिकल रूम में लैब अटेंडेंट तो नियुक्त कर दिए गए हैं, लेकिन बच्चों को कंप्यूटर पढ़ाने के लिए अध्यापकों की नियुक्ति अभी तक नहीं की गई। इसके अलावा कुछ सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए कंप्यूटर विषय से संबंधित आवश्यक शिक्षण सामग्री नहीं पहुंची है।
जानकारी के अनुसार क्षेत्र के बड़े स्कूलों में तीन-तीन कंपनियों से अपनी लैब लगाई हुई है। एनआईसीटी और अबरो लैब मई 2011 में शुरू हुई। इन कंपनियों ने लैब अटैंडड को नियुक्त कर दिया, लेकिन कंप्यूटर अध्यापक अब तक नहीं भेजा गया है। इसके अलावा पिछले करीब तीन साल से लैब अटैंडेंट को भुगतान तक नहीं किया गया। श्रीराम सीआईटी कंपनी ने स्कूलों में अध्यापक तो नियुक्त कर दिए, लेकिन उनका वेतन अभी तक नहीं दिया ।
शिक्षा विभाग से नहीं मिल रहा कोई सहयोग
निजि कंपनियों के हवाले करके शिक्षा विभाग जैसे कम्प्यूटर शिक्षा को भूल ही गया है। तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी शिक्षा विभाग ने प्रदेश के स्कलों में अभी तक कंप्यूटर के लिए किताबें उपलब्ध नहीं करवाई है। इसके अलावा विद्यार्थियों को कंप्यूटर बारे में किसी प्रकार को ज्ञान नहीं है। इस संदर्भ में शिक्षा विभाग के अधिकारी भी निजी कंपनी का हवाला देकर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं।
स्कूल में ना तो कंप्यूटर की किताब है। ना ही उन्हें यह पता कि कम्प्यूटर में करना क्या है। पिछले तीन साल से कम्प्यूटर के बारे में उनकी नॉलेज शून्य के समान है। कक्षाएं भी कभी कभी लगती है-
हिना, छात्रा
जब विद्यार्थियों को कंप्यूटर शिक्षा का कोई प्रमाणपत्र ही नहीं मिलता है। ना ही कोई पेपर लिया जाता है। इससे कंप्यूटर लैब में समय बर्बाद होता है-
प्रिया, छात्रा
हमें कंप्यूटर खोलना और बंद करना तो आता है, लेकिन शिक्षक और किताब न होने से विद्यार्थियों को कंप्यूटर का लाभ नहीं मिल रहा है
राधिका, छात्रा
पिछले एक वर्ष से यही सुन रहे है कि कंप्यूटर की किताब सबको मिलेगी, लेकिन अभी तक कोई किताब नहीं आई। बिना किताब के क्लास के विद्यार्थी कैसे कंप्यूटर सीखेंगे।
शमा,छात्रा