कोरोना में मारे गए लोगों के बच्चों की मदद को लेकर आयोजित बैठक में भाग लेते हुए अधिकारीगण
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कैथल। कोरोना काल में बेसहारा हुए चार बच्चों की सरकार की ओर से मदद की गई। डाकखाने में इनके खाते खुल चुके हैं। जब इन बच्चों की आयु 23 वर्ष की हो जाएगी तो सभी को 10-10 लाख रुपये मिलेंगे। इसके साथ इन्हें प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (आयुष्मान) से जोड़ा गया है। जरूरत पड़ने पर इनके कार्ड से इन्हें सालाना पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल सकता है।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत योजना में 18 वर्ष की आयु तक ऐसे बच्चों के पालन-पोषण, पढ़ाई आदि के लिए आर्थिक मदद देने का प्रावधान किया गया है, जिनके अभिभावक कोरोना से चल बसे थे। जिले में पूर्व में ऐसे चार बच्चे मिले थे, जिन्हें योजना के तहत मदद दी गई। अब चार अन्य और बच्चे मिले हैं, जिनके अभिभावकों की मृत्यु कोरोना संक्रमण से हुई थी। एनसीपीसीआर डॉट जीओवी डॉट इन/बाल स्वराज पोर्टल पर इनकी जानकारी अपलोड की जा चुकी है। लघु सचिवालय स्थित सभागार में डीसी प्रदीप दहिया ने मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना से संबंधित जिला स्तरीय कमेटी की बैठक में यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि योजना के तहत हर महीने 2500 रुपये नकद आर्थिक सहायता के तौर पर इन्हें दिए जा रहे हैं। बच्चे को संभालने वाले परिवार को 12 हजार रुपये की सहायता दी जाएगी। उन्होंने बताया कि यह सहायता बच्चों के 18 वर्ष (वयस्क) होने तक ही दी जाएगी। कोरोना संक्रमण के कारण माता-पिता को खोने वाले बच्चों को मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के साथ पीएम केयर से भी आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। इसी के तहत उन्हें जन आरोग्य योजना से जोड़ा गया है। इस मौके पर सीटीएम गुलजार अहमद, सीएमओ जयंत आहुजा, सीडब्ल्यूसी के चेयरमैन राणा बंसल, डीसीपीआ कोमल, सीडीपीओ शशी बाला मौजूद रहे।
ढाई हजार रुपये प्रतिमाह और सालाना 12000 की मिलती है मदद
मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत प्रतिमाह 2500 रुपये दिए जाएंगे। शिक्षा के लिए प्रति वर्ष 12000 हजार रुपये की अतिरिक्त सहायता दी जाएगी। 18 साल तक आयु तक 1500 रुपये प्रति माह वित्तीय सहायता आवर्ती जमा खाते में जमा कराई जाएगी। 21 साल के होने पर उसे मिल सकेगी। अनाथ किशोरियों को कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में शिक्षा में वरीयता के साथ आवासीय सुविधा दी जाएगी। शादी के समय 51 हजार दिए जाएंगे। आठवीं से 12वीं तक पढ़ाई के लिए बच्चों को टैबलेट दिए जाएंगे। जिन बच्चों के अभिभावक नहीं, उन्हें राज्य के बाल देखरेख संस्थानों में रखा जाएगा