कैथल। सीजन में मंडियों में से गेहूं खरीदने के बाद लगभग साढ़े सात लाख एमटी मात्रा में गेहूं को एफसीआई सीजन के दौरान ही दूसरे राज्यों में भेजने की योजना पर काम कर रहा है। सीजन के शुरुआती दिनों में योजना के तहत हजारों एमटी गेहूं दूसरे राज्यों में भेज भी दिया है। इस कवायद में एफसीआई ने विभिन्न खरीद एजेंसियों सहित रेेलवे व सड़क मार्ग के लिए दूसरी एजेंसियों से तालमेल किया है। पूरी प्रक्रिया में भंडारण पर खर्च होने वाले लगभग 10 करोड़ 50 लाख रुपये से अधिक की राशि की बचत एफसीआई को होगी।
गौरतलब है कि अभी तक एफसीआई मंडियों से गेहूं खरीद कर खुद के या फिर दूसरी खरीद एजेंसियों के गोदामों, खुले में बनाए गए प्लिंथ पर गेहूं का स्टॉक करता आया है। इस स्टॉक की सुरक्षा, रखरखाव पर एफसीआई को भारी भरकम खर्च करना पड़ता है। कई बार यह गेहूं सालों तक दूसरे राज्यों में नहीं भेजा जा सकता। इस कारण एफसीआई का भंडारण खर्च बढ़ता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए चालू सीजन में एफसीआई ने पहले से ही रेलवे के साथ तालमेल कर पूरे प्रदेश से 145 विशेष ट्रेनों की बुकिंग की है। इसमें एक ट्रेन में लगभग 70 से 72 हजार कट्टे आते हैं। इसके अलावा बड़े ट्रालों के माध्यम से साथ लगते राज्यों राजस्थान, दिल्ली व उत्तर प्रदेश में सड़क मार्ग से गेहूं सीधा मंडियों से भेजा जा रहा है। कैथल से दो दिनों में सड़क मार्ग से बड़े ट्रालों में दिल्ली व राजस्थान में गेहूं भेजा है। वहीं दो विशेष ट्रेनों से गेहूं बिहार भेजा जा चुका है। इसके अलावा गुजरात, यूपी, कर्नाटक, आसाम, नागालैंड में भेजा जाना प्रस्तावित है। इसी प्रकार से दूसरे जिलों से भी उन राज्यों में गेहूं भेजने की पूरी तैयारी की है, जहां गेहूं की खपत है और वहां गोदामों में स्टॉक किए जाने की सुविधा है।
एफसीआई के उप-महानिदेशक हरियाणा प्रदीप सिंह ने बताया कि पूर्व में गोदामों में गेहूं स्टॉक किया जाता था। इसके रखरखाव पर भी खर्च आता है। एफसीआई ने गेहूं के सीजन में मंडियों से ही रेलवे व सड़क मार्ग से दूसरे राज्यों को गेहूं भेजने की प्रक्रिया शुरू की है। इससे लगभग दस करोड़ 50 लाख रुपये का खर्च बचेगा। सीजन के दौरान ही लगभग साढ़े सात लाख एमटी गेहूं दूसरे राज्यों को भेज दिया जाएगा। इसके लिए सीजन के दौरान 145 रैक (विशेष ट्रेन) बुक की हैं। शेष गेहूं के स्टॉक के लिए एफसीआई के पास लगभग 70 लाख एमटी गेहूं के स्टॉक का प्रबंध है।