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गुरु पूर्णिमा भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण पर्व : डॉ. मनोज

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व्यास पूर्णिमा पर संस्कृत विश्वविद्यालय में गुरु-शिष्य परंपरा पर अपने विचार रखते मुख्याति​थि व
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कैथल। महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय के टीक परिसर में व्यास पूर्णिमा यानी गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गुरु-शिष्य परंपरा विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि डॉ. मनोज भांबू ने कहा कि गुरु पूर्णिमा भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण पर्व है। यह केवल गुरु के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का अवसर नहीं बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा के मूल्यों को आत्मसात करने का भी संदेश देता है। उन्होंने कहा कि गुरु ही व्यक्ति के जीवन को सही दिशा प्रदान करता है।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य राजेंद्रकुमार अनायत ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. भीमराव अंबेडकर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. मनोज भांबू मौजूद रहे। कुलपति आचार्य राजेंद्र कुमार अनायत ने कहा कि भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा विश्व की सबसे समृद्ध ज्ञान परंपराओं में से एक है। एक सच्चा गुरु योग्य और जिज्ञासु शिष्य का मार्गदर्शन करते हुए उसे आत्मसाक्षात्कार की ओर अग्रसर करता है। उन्होंने कहा कि गुरु का दायित्व केवल शिक्षा देना नहीं बल्कि शिष्य के व्यक्तित्व और जीवन मूल्यों का निर्माण करना भी है। उन्होंने आधुनिक और पारंपरिक शिक्षा पद्धतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि अध्यापक से गुरु बनने की यात्रा ही भारतीय शिक्षा-दर्शन का वास्तविक उद्देश्य है।

व्यास पूर्णिमा पर संस्कृत विश्वविद्यालय में गुरु-शिष्य परंपरा पर अपने विचार रखते मुख्यातिथि व

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