संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड (केडीबी) की 48 कोस परिक्रमा में शामिल सौंगल गांव स्थित वामन तीर्थ इन दिनों अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। वर्षों पूर्व जिस तीर्थ को धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को देखते हुए 48 कोस की परिक्रमा में शामिल किया गया था, वहां आज खंडहर, झाड़ियां और गंदगी ही नजर आती हैं।
सिर्फ कागज़ों में विकास, धरातल पर शून्य ः वामन नामक यह तीर्थ कैथल से लगभग 18 कि.मी. दूर सौंगल गांव के दक्षिण- पश्चिम में स्थित है। अगस्त 2019 में वामन तीर्थ को केडीबी ने 48 कोस परिक्रमा का हिस्सा बनाया था लेकिन इसके बाद से अब तक कोई भी ठोस विकास कार्य शुरू नहीं किए गए। क्षेत्रवासियों का कहना है कि बोर्ड की ओर से सिर्फ कागजों में नाम दर्ज कर देना पर्याप्त नहीं है, जब तक कि वहां श्रद्धालुओं की सुविधाओं और धार्मिक गरिमा के अनुरूप सुधार न किया जाए।
स्थानीय लोगों में नाराज़गी ः स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि तीर्थ स्थल की उपेक्षा न केवल क्षेत्र के ऐतिहासिक महत्व को आहत करती है, बल्कि धार्मिक आस्था को भी ठेस पहुंचाती है। तीर्थस्थल की बदहाल स्थिति और फैली गंदगी से यहां आने वाले श्रद्धालु भी निराश होकर लौटते हैं। लोगों की मांग है कि सरकार और केडीबी को इस तीर्थ के पुनर्निर्माण और सुंदरीकरण के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
वामन तीर्थ न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, इतिहास और मान्यताओं का भी अहम प्रतीक है। इसकी उपेक्षा, केवल तीर्थ की नहीं, बल्कि हमारी धार्मिक धरोहरों की उपेक्षा भी मानी जाएगी।