संवाद न्यूज एजेंसी
गुहला-चीका/कैथल। घग्गर नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से गुहला-चीका क्षेत्र के छह गांवों में पानी भर गया है। सिहाली और रत्ताखेड़ा गांव की सड़कों पर ढाई से तीन फीट तक पानी बह रहा है। खेतों में पानी घुसने से यहां की फसलें पूरी तरह डूब चुकी हैं।
फिलहाल नदी का जलस्तर खतरे के निशान से करीब आधा फीट नीचे है, लेकिन पानी का दबाव बढ़ने से हालात चिंताजनक बने हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि करीब 400 एकड़ फसल जलमग्न हो गई है और इसका असर 20 हजार से अधिक आबादी पर पड़ सकता है।
लगातार बढ़ रहा है जलस्तर ः मंगलवार तक घग्गर नदी का प्रवाह 45,96 क्यूसिक था, जो बुधवार को बढ़कर 47,281 क्यूसिक तक पहुंच गया। टटियाना के सरकारी गेज के अनुसार बुधवार शाम सात बजे नदी का जलस्तर 22.6 फीट दर्ज किया गया। पानी का यह स्तर आसपास के गांवों में खतरे का संकेत बन गया है। सिहाली, रत्ताखेड़ा, मंझहेड़ी, मैगड़ा, बुड़नपुर और भूसलां गांवों में पानी खेतों और रास्तों तक पहुंच चुका है। खतरे का निशान 23 फीट पर है।
चिंता बरकरार ः अभी तक यह पानी रिहायशी इलाकों तक नहीं पहुंचा है। फिर भी गांवों में फैला जलभराव लोगों की मुश्किलें बढ़ा रहा है। खेतों में डूब रही फसलों के कारण किसान सबसे अधिक चिंतित हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पीआर धान पककर तैयार हो चुका है। ऐसे में पानी भरने से पूरी फसल खराब हो जाएगी और दूसरी फसलों की बिजाई का समय भी निकल जाएगा।
ग्रामीणों के आरोप ः ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारें हर बार बाढ़ नियंत्रण के पुख्ता प्रबंधों का दावा करती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता। जब भी नुकसान होता है, मुआवजे के नाम पर केवल औपचारिकता पूरी की जाती है। उनका कहना है कि इस बार भी अगर समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो बड़ी तबाही से इन्कार नहीं किया जा सकता। अभी पानी खतरे के निशान तक नहीं पहुंचा है।
दो साल पुराना दर्द
गुहला-चीका क्षेत्र के कई गांव वर्षों से बाढ़ की मार झेल रहे हैं। सिहाली, रत्ताखेड़ा धड़ाम, पपराला, अरनौली, मंझहेड़ी, मैगड़ा, बुड़नपुर, भूसलां, दाबा, चाबा, रत्ताखेड़ा लुकमान और भाटिया गांव बाढ़ प्रभावित इलाकों की सूची में आते हैं। यहां घग्गर और मारकंडा नदी का पानी टटियाना घग्गर नदी से ओवरफ्लो होकर हांसी-बुटाना नहर में प्रवेश करता है और सैलाब का रूप ले लेता है। यही पानी गांवों में तबाही का कारण बनता है।
34 गुहला-चीका। रत्ताखेड़ा से सिहाली की सड़क पर बहता पानी। संवाद