कैथल। महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय में 17 से 30 मार्च तक आयोजित संस्कृत भाषा कौशल संवर्धन प्रशिक्षण शिविर का समापन सोमवार को हुआ। इस मौके पर कुलगुरु प्रो. राजेंद्र कुमार अनायत ने कहा कि संस्कृत ज्ञान परंपरा की आधारशिला है।
यह शिविर भारतीय ज्ञान परम्परा शोध एवं प्रशिक्षण केंद्र और भारत संस्कृत परिषद् के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया था, जिसमें इंटर्नशिप प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को संस्कृत के व्यावहारिक प्रयोग और भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न आयामों का प्रशिक्षण दिया गया।
समापन समारोह विश्वविद्यालय के टीक परिसर सभागार में आयोजित हुआ, जिसकी अध्यक्षता कुलगुरु प्रो. राजेन्द्र कुमार अनायत ने की। मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. गणेश दत्त भारद्वाज उपस्थित रहे जबकि कुलसचिव प्रो. संजय गोयल का विशेष सान्निध्य रहा।
मुख्य अतिथि डॉ. गणेश दत्त भारद्वाज ने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण शिविर संस्कृत की समृद्ध परंपरा को पुनर्जीवित करने में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने संस्कृत साहित्य की उपयोगिता पर भी प्रकाश डाला। इसके सफल संचालन में डॉ. जगत नारायण और डॉ. कृष्ण चंद्र पाण्डेय की महत्वपूर्ण भूमिका रही। संवाद