संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। लोहड़ी का त्योहार खुशियों, परंपराओं और पारिवारिक एकता का प्रतीक माना जाता है। जब यह पर्व किसी नवविवाहिता की ससुराल में पहली बार मनाया जाता है, तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। पहली लोहड़ी नई बहू के सम्मान, प्यार और घर की नई शुरुआत का उत्सव बन जाती है।
इस पर्व के लिए नवविवाहिताओं में उत्साह देखने को मिल रहा है। लोहड़ी का त्योहार नवविवाहिता के लिए यह पर्व नए रिश्तों और परिवार के साथ जुड़ने का प्रतीक बन जाता है। इस दिन घर में नए जीवन की शुरुआत का जश्न
मनाया जाता है। मुस्कान और ज्योति भी इस पर्व को लेकर बेहद उत्साहित हैं। दोनों ने कहा कि पहला त्योहार जीवन की नई शुरुआत का प्रतीक होता है और इसे लेकर मन में कई उमंगें रहती हैं। इसके साथ ही, यह पर्व पारिवारिक रिश्तों को मजबूत करने और नई बहुओं को परिवार के साथ घुलने-मिलने का अवसर भी देता है।
घर में सजावट और तैयारियों का माहौल
मुस्कान ने बताया कि उनकी शादी हाल ही में हुई है और यह उनकी ससुराल में पहली लोहड़ी होगी। घर में सजावट और तैयारियों का माहौल है, रिश्तेदारों का आना-जाना शुरू हो गया है। लोहड़ी के दिन ससुराल पक्ष की ओर से निभाई जाने वाली रस्मों को लेकर वह बेहद उत्साहित हैं। मुस्कान ने कहा, “इस दिन बहू को उपहार, वस्त्र और श्रृंगार का सामान दिया जाता है, जो मेरे लिए बेहद खास अनुभव होगा।” लोहड़ी की आग के चारों ओर बैठकर गीत गाना और रेवड़ी, मूंगफली व तिल के लड्डू बांटना इस पर्व की खास पहचान है।
पहली लोहड़ी जिम्मेदारी अपनापन लेकर आई
ज्योति ने बताया कि मेरी पहली लोहड़ी जिम्मेदारी और अपनापन लेकर आई है। लोहड़ी की रात परिवार के साथ अग्नि के चारों ओर जुटना और बड़ों का आशीर्वाद लेना सबसे भावुक पल होंगे। लोहड़ी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि परिवार को जोड़ने का अवसर भी है। शादी के बाद पहली बार वह यह त्योहार नए परिवार के साथ मनाएंगी, इसलिए उन्हें विशेष खुशी है। ससुराल की बुजुर्ग महिलाएं उन्हें हर रस्म के बारे में समझा रही हैं, जिससे वे परंपराओं को जानने और अपनाने का अनुभव ले रही हैं। लोहड़ी की रात अविस्मरणीय रहेगी।
मुस्कान