संवाद न्यूज एजेंसी
पाई। अनाज मंडी में लदान न होने के चलते जहां आढ़तियों को परेशानी हो रही है। वहीं, किसानों को गेहूं की फसल की अदायगी भी रुकी गई है। आढ़ती मंडी प्रधान कृष्ण ढुल, पूर्व प्रधान रणधीर सिंह फौजी, इश्वर, जैली आदि ने बताया मंडी बोरियों से अटी पड़ी है। मंडी में से लदान कछुए की चाल की तरह चल रहा है।
उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि कि उनको डर है कि कही कोई हादसा न हो जाए। बताया कि मंडी में अधिक समय तक गेहूं के कट्टों में कमी हो जाती है। मंडी में जहां चोरी होने का डऱ रहता है, वही दुसरी ओर मंडी में पड़े कट्टों में में आग लगने व बरसात में खराब होने का डऱ भी लगा रहता है।
उन्होंने बताया कि सरकार किसानों को उनकी फसल की अदायगी 72 घंटों में करने के थोथे दावें कर रही है। उन्होंने बताया कि किसानों के जे फार्म जरनेट करने के बाद भी कई दिनों तक उठान नही होता और सरकार किसानों को उनकी फसल की अदायगी गोदामों में लगने के बाद ही 72 घंटों के बाद आती है, जो किसानों के साथ धोखा है।
किसानों का उनकी फसल का जे फार्म जरनेट होने के बाद अदायगी होनी चाहिये। उन्होंने सरकारी खरीद एजेंसियों को चेतावनी भी दी है कि वे अब किसी भी खरीद एजेंसी को न तो शोरटेज देगें और आग लगने, बरसात में खराब होने आदि किसी भी नुकसान की उनकी कोई जिम्मेदारी नहीं है। यदि खरीद एजेंसियां उनके साथ धक्का करती है तो वे कोर्ट में जायेंगे। उन्होंने यह भी मांग की है कि जे फार्म बनने के बाद की तारीख से अदायगी वाली तारीख तक का ब्यााज सरकार किसानों को दे।
उधर, मार्केट कमेटी सचिव जोगिंद्र सिंह पेसियां ने बताया कि मंडी में से लगभग 30 प्रतिशत बोरियों का लदान हो चुका है। मंडी में 23 अप्रैल तक 386548 बोरियां आ चुकी थी, जिसमें से 114148 बोरियों का उठान भी हो गया है। सीजन अब लगभग समाप्त हो चुका है और अब उठान में तेजी आ जायेगी।