संवाद न्यूज एजेंसी
ढांड। अनाज मंडी में बारदाना की मांग पर बुधवार को किसानों ने समाजसेवी विकास तंवर के नेतृत्व में प्रशासन को चकमा देते हुए पंचमुखी चौक ढांड पर ट्रैक्टरों के साथ जाम लगा दिया। इससे सड़क पर वाहनों की लंबी-लंबी कतारें लग गई। जाम लगने से प्रशासन के हाथ पांव फूल गए। समाचार लिखे जाने तक किसान पंचमुखी चौक पर गद्दे बिछा कर धरने पर बैठे हुए थे।
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार किसान विस्तार अनाज मंडी में विकास तंवर के बुलावे पर ट्रैक्टरों पर सवार होकर पहुंचे। तंवर ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार हमें जानबूझकर परेशान करने में लगी हुई है। हमारी केवल एक ही मांग है कि ढांड मंडी में बारदाना मुहैया करवाया जाए। इससे किसान आराम से दुकानों में बैठकर अपना अनाज बेच सकें लेकिन सरकार ना जाने क्यों हमारे साथ इस प्रकार का मजाक कर रही है।
तंवर ने कहा कि जब प्रदेश का किसान मंडियों में अनाज बेच रहा है तो ढांड एरिया के किसानों को इससे वंचित क्यों किया जा रहा है। किसानों ने एलान किया कि शीघ्र ही अदानी साइलो के गेट की तालाबंदी के लिए ट्रैक्टरों के साथ कूच किया जाएगा।
नाराज किसानों को एसडीएम ब्रह्म प्रकाश, डीएसपी गुरविंद्र सिंह, डीएसपी ललित कुमार ने किसानों को समझाने का प्रयास किया लेकिन विकास तंवर ने कहा कि आज हमारे दो ही रास्ते हैं- पहला बारदाना दूसरा जेल। अब आपके हाथ है कि आप हमारे लिए कौन सा रास्ता अपनाना चाहते हैं। तंवर ने कहा कि हम तो केवल खाली बोरी मांग रहे हैं। उसे भर कर वापस सरकार को दे देंगे। फिर हमें खाली बोरी देने में सरकार का क्या जाता है। यही बात हमारे समझ से परे है। तंवर ने कहा कि एफसीआई के एजीएम ने मुझे कहा कि बारदाना देने के लिए कल ही पत्र जारी कर दिया जाएगा, लेकिन अगले दिन ना जाने किसके इशारे पर उस पत्र को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। एसडीएम दिनभर प्रशासनिक उच्चाधिकारियों के साथ मोबाइल पर बात करते रहे, लेकिन कोई हल नहीं निकला। किसान ट्रैक्टरों को सडक़ पर बंद करके नीचे जमीन पर ही बैठ गए और नारेबाजी करते हुए एक ही बात कह रहे है कि मंडी बंद तो अदानी बंद। समाचार लिखे जाने तक किसान पंचमुखी चौक पर गद्दे बिछा कर धरने पर बैठे हुए थे। अनाज मंडी में जब किसानों ने प्रशासनिक अधिकारियों की बात नहीं मानी तो पुलिस प्रशासन अदानी साइलो के गेट पर तैनात हो गया लेकिन किसानों ने प्रशासन को चकमा देते हुए पंचमुखी चौक पर डेरा जमा लिया। पुलिस अधिकारी ट्रैक्टरों के चालान करने के लिए उनके रजिस्ट्रेशन नंबर ढूंढते रहे लेकिन उन्हें एक भी ट्रैक्टर का रजिस्ट्रेशन नंबर नहीं मिला। कुछ किसान यह कहते हुए नजर आए कि इससे हम डरने वाले नहीं है।