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झाड़ कम होने से किसान मायूस

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फोटो संख्या-42 से 44
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झाड़ कम होने से किसान मायूस
प्रति एकड़ आठ से 10 मण कम निकल रही औसत
अकेले कैथल जिले में किसानों को 300 करोड़ से अधिक का नुकसान
प्रति एकड़ आठ से 10 हजार रुपये का नुकसान
जिले में चार लाख 12 हजार 500 एकड़ में हुई है गेहूं की खेती
मंडी में भी अब तक काफी कम मात्रा में पहुंचा है गेहूं
खर्च भी पूरा नहीं हो पा रहा किसानों का, ठेके पर जमीन लेकर काम करने वाले लोगों के लिए परेशानी का बड़ा सबब
आखिर कैसे पूरे होंगे खर्च, डीजल और दवाओं की बढ़ती कीमतों से खर्च बढ़ा, आमदनी घटी
नसीब सैनी
कैथल। गेहूं की फसल में हुए नुकसान से इस बार किसान परेशान हैं। मार्च माह के पहले सप्ताह तक भी लहलहाती फसल को देखकर किसान उत्साहित थे लेकिन मार्च में आए मौसम के झटके ने किसानों के सपनों पर पानी फेर दिया। अब जब किसान फसल काट रहे हैं तो उन्हें कम उत्पादन देखकर झटका लग रहा है। जिले में प्रति एकड़ औसतन चार से पांच क्विंटल गेहूं का कम उत्पादन मिल रहा है। जिले में चार लाख 12 हजार 500 एकड़ रकबे में गेहूं की बुवाई की गई है। एक मोटे अनुमान के अनुसार अकेले कैथल जिले में किसानों को तीन सौ करोड़ से अधिक का नुकसान होता दिख रहा है।
कैथल जिले में एक लाख 65 हजार हेक्टेयर में गेहूं की बुवाई की गई है। यदि इस आंकड़े को एकड़ में देखा जाए तो चार लाख 12 हजार 500 एकड़ में गेहूं की बुवाई की गई थी। पिछले साल जिले में कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार 45 मण प्रति एकड़ की औसत से उत्पादन हुआ था। कई किसानों का 55 से 60 मण प्रति एकड़ भी गेहूं निकला था लेकिन इस बार औसतन 30 से 40 मण, कुछेक किसानों का 40 से 45 मण प्रति एकड़ गेहूं निकल रहा है। एक मोटे अनुमान के अनुसार पिछले साल के मुकाबले प्रति एकड़ आठ से 10 मण का नुकसान किसानों को हुआ है। पूरे जिले के किसानों का औसत यदि इतना ही कम निकलता है तो अकेले कैथल जिले में किसानों को 300 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान होने का अनुमान है। जिला कृषि उपनिदेशक डॉ. कर्मचंद ने कहा कि जिले में चार लाख 12 हजार 500 एकड़ में गेहूं का उत्पादन होता है। पिछले साल औसत उत्पादन 20 क्विंटल प्रति एकड़ था। इस बार इसमें 10 प्रतिशत तक के नुकसान की आशंका है। इसका कारण फरवरी और मार्च में ज्यादा बारिश व पिछैती किस्मों में गर्मी के कारण दाना सिकुड़ना रहा है।
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कृषि विज्ञान केंद्र के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. रमेश वर्मा ने कहा कि जनवरी और फरवरी में लगातार बारिश के कारण फुटाव प्रभावित हुआ। मार्च माह में एकदम से तापमान बढ़ गया। इसके कारण दूधिया स्टेज लंबा नहीं चल पाई, जिससे गेहूं की फसल जल्दी पक गई। इसी कारण यह नुकसान हुआ है।
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गांव रोहेड़िया निवासी महेंद्र जागलान ने कहा कि पिछले साल उनका प्रति एकड़ औसत 50 से 60 मण उत्पादन हुआ था। इस बार यह अधिकतम 40 मण तक ही रह गया है। इससे काफी नुकसान हुआ है। खर्च भी इस बार मुश्किल से पूरा हो पाएगा। मौसम की मार के साथ-साथ किसान महंगाई की मार झेल रहा है। जिस किसान ने ठेके पर फसल लेकर खेती की है, उसे ज्यादा नुकसान झेलना पड़ रहा है।
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पट्टी अफगान के किसान सतीश कुमार ने बताया कि इस वर्ष गेहूं का झाड़ पिछले साल से 15 मण तक कम रहा है। लागत के हिसाब से गेहूं की फसल नहीं निकली है। ठेका पर जमीन लेने वाले किसानों को कोई मुनाफा नहीं है। 40 मण के हिसाब से ही गेहूं की फसल निकल रही है। पिछले सीजन में 55 से 60 मण तक गेहूं निकला था।
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रोहेड़िया के मनोज कुमार ने कहा कि इस बार डीजल सहित कृषि वस्तुओं की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है। गेहूं की अच्छी फसल निकलने से उम्मीद थी कि किसानों का कुछ खर्च पूरा होगा लेकिन उत्पादन ने कमर तोड़ कर रख दी। किसान दोहरी मार झेलने को मजबूर हैं। कम उत्पादन से खर्च नहीं निकल रहा। फसल उठाने और तूड़ा बनवाने में महंगे डीजल के कारण डेढ़ गुणा ज्यादा कीमत अदा करनी पड़ रही है।
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13 अप्रैल तक हुई तीन लाख 27 हजार 420 एमटी की आवक
जिले की अनाज मंडियों में 13 अप्रैल तक 3 लाख 27 हजार 420 एमटी गेहूं की आवक हुई है। एक अनुमान के अनुसार 60 प्रतिशत गेहूं की आवक हो चुकी है। इस तरह से पिछले साल के 6 लाख एमटी से अधिक की आवक हुई थी। इस बार मुश्किल से चार या पांच लाख एमटी गेहूं की आवक होने का अनुमान पूरे सीजन में लगाया जा रहा है।
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