रूस-यूक्रेन विवाद के चलते पढ़ाई के लिए यूक्रेन गए विद्यार्थियों के परिजनों की सांसें अटक गईं हैं। मुख्य रूप से रूस की सीमा के आसपास के इलाके में स्थित विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं के अभिभावक परेशान हैं। मंगलवार को ही भारतीय दूतावास ने गैर जरूरी कार्यों से यूक्रेन गए लोगों को यूक्रेन छोड़ने की सलाह दी है लेकिन विश्वविद्यालयों में ऑनलाइन कक्षाएं न होने के कारण बच्चे वहीं रहकर पढ़ाई पूरी करने को मजबूर हैं। अमर उजाला से बातचीत में कई अभिभावकों ने इस पर चिंता जताई। हरियाणा के कैथल जिले से ही करीब सौ से अधिक बच्चे यूक्रेन में पढ़ाई के लिए गए हैं। इनमें से ज्यादातर मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं।
कैथल निवासी अभिभावक विजय बंसल ने कहा कि उनके बेटे का वहां छठा सेमेस्टर है। वह कई दिनों से चिंतित थे। भारतीय दूतावास ने मंगलवार को एडवाइजरी जारी की है। उसमें कहा गया है कि बिना जरूरी काम के यूक्रेन में जो भारतीय हैं, वे स्वदेश लौट सकते हैं।
अब बच्चे दूतावास की एडवाइजरी को ध्यान में रखते हुए लौट सकते हैं। अभी बच्चों को खतरा तो नहीं है लेकिन चिंता बनी हुई है। बताया जा रहा है कि विश्वविद्यालय कक्षाएं छूटने पर जुर्माने से छूट की बात कह रहे हैं। बाद में कक्षाएं पूरी करनी पड़ेंगी। इससे बच्चों और अभिभावकों की परेशानी बढ़ेगी।
गुहला क्षेत्र निवासी निशान ने कहा कि उनके बेटे को वहां पांचवां साल है। वैसे तो कोई दिक्कत नहीं हैं लेकिन अब दूतावास ने जो एडवाइजरी जारी की है, उसके बाद बच्चे वापस आना चाहते हैं। अब जो टिकट 30 ये 35 हजार रुपये में हो जाती थी, वह अब 70 से 80 हजार रुपये में भी आसानी से नहीं मिल रही है। साथ ही कई इलाके ऐसे हैं, जहां फ्लाइट की उड़ान ही बंद हैं। उनकी मांग है कि भारतीय दूतावास बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करे और जरूरत पड़ने पर विशेष विमान से बच्चों को वापस लाने की व्यवस्था भी करे।
चीका निवासी दो अन्य बच्चों के अभिभावकों ने कहा कि उनके बच्चे यूक्रेन के विपरीत दिशा के विश्वविद्यालय इवाको फ्रेंक विश्वविद्यालय में हैं। बच्चे पूरी तरह से सुरक्षित हैं। विश्वविद्यालय ने एक तो एडवाइजरी जारी करने में देरी की है। कई देशों ने अपने नागरिकों को पहले ही निकाल लिया है। दूसरा अब बच्चे वापस आने का प्रयास कर रहे हैं तो टिकट नहीं मिल पा रहा है। कई इलाकों से फ्लाइट ही नहीं हैं। उनकी मांग है कि बच्चों से निरंतर संपर्क बनाते हुए कीव स्थित भारतीय दूतावास उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करे।
ऑनलाइन कक्षाएं न होने से परेशानी
यूक्रेन में इस आपात स्थिति में भी अधिकतर विश्वविद्यालयों में ऑफलाइन कक्षाएं चल रही हैं। अभिभावक निशान सिंह ने कहा कि यदि विश्वविद्यालय ऑनलाइन कक्षाएं लगाने की अनुमति दे दे तो बच्चे यहां आकर बिना किसी डर के कक्षाएं कर सकते हैं लेकिन अब तक कोई भी विश्वविद्यालय ऑफलाइन कक्षाएं नहीं चला रहा है, जो मुख्य परेशानी का कारण है। उधर, इस सबंध में डीसी प्रदीप दहिया ने कहा कि किसी अभिभावक ने शिकायत नहीं की है कि ना ही आधिकारिक तौर पर कोई सूचना है।