संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। वार्ड-10 के प्रजापत मोहल्ले में शनिवार की सुबह प्रधानमंत्री सोलर योजना के तहत लगाए गए दो किलोवाट क्षमता के सोलर पैनल के इन्वर्टर में अचानक आग लग गई, जिससे परिवार को आर्थिक झटका लगा।
वार्ड नंबर 10 निवासी कमला देवी ने बताया कि दो माह पहले उन्होंने प्रधानमंत्री सोलर योजना के तहत दो किलोवाट क्षमता का सोलर सिस्टम अपनी छत पर लगवाया था।
परिजनों का कहना था कि इन्वर्टर घर के ऊपर कमरे में स्थापित था। सुबह करीब 6:30 बजे, अचानक एक तेज धमाके की आवाज आई। पड़ोसियों ने उन्हें बताया कि ऊपर के कमरे में आग लगी है और धुआं निकल रहा है।
आस-पास के लोगों ने करीब आधे घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक काफी नुकसान हो चुका था। पीड़ित परिवार ने बताया कि इन्वर्टर, चौबारे की कड़ियों से बनी छत और कमरे में रखा कीमती घरेलू सामान पूरी तरह जलकर नष्ट हो गया। इस भीषण हादसे में परिवार को लगभग ढाई से तीन लाख रुपये का नुकसान हुआ है। आग के दौरान अफतरातफरी मच गई थी।
पीड़ित परिवार ने राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन से आर्थिक सहायता की गुहार लगाई है ताकि वे इस नुकसान से उबर सकें। आग लगने के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है।
उत्पादों की प्रमाणिकता पर विशेष ध्यान दें ः कौशिक
उड़ान सोलर के निदेशक कमल कौशिक ने बताया कि आग लगने के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें हल्की वायरिंग, कमजोर पैनल या दोयम क्वालिटी का इन्वर्टर शामिल हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सोलर योजना के तहत लगाए जा रहे पैनल और इन्वर्टर की प्रमाणिकता उपभोक्ता डीसीआर पोर्टल पर स्वयं जांच सकते हैं। कौशिक ने कहा कि पैनल और इन्वर्टर के सीरियल नंबर पोर्टल पर डालने के बाद यदि नॉक फाउंड लिखा आए, तो इसका अर्थ है कि उपकरण असत्यापित है। उन्होंने उपभोक्ताओं से आगाह किया कि सोलर सिस्टम लगवाते समय तारों की गुणवत्ता पर ध्यान दें और एल्यूमिनियम की बजाय कॉपर की वायरिंग का उपयोग करें। यदि डीसी करेंट की कान्फेंस सही नहीं होगी, तो इस तरह की दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। उन्होंने यह भी कहा कि पैनल की नियमित सफाई और इन्वर्टर के समय-समय पर रखरखाव से सिस्टम की जीवन अवधि बढ़ती है और आग लगने जैसी अप्रिय घटनाओं की संभावना कम होती है। कौशिक ने उपभोक्ताओं से आग्रह किया कि इंस्टालेशन और सर्विसिंग केवल प्रमाणित तकनीशियनों से ही करवाएं।