यूक्रेन से एमबीबीएस प्रथम श्रेणी में पास करने के बाद अपने पैतृक गांव कलायत पहुंची डॉ. सिमरन का सामाजिक संगठनों व परिवार के सदस्यों द्वारा भव्य स्वागत किया गया। कलायत बस स्टैंड से बैंड बाजे व आतिशबाजी के साथ सिमरन को उसके घर तक लाया गया। सामाजिक संगठनों ने घर पहुंची सिमरन को बुके देकर उसका नागरिक अभिनंदन किया। सिमरन ने कहा कि उनका सपना था कि वह बड़ी होकर डॉक्टर बने। उनके सपने को पूरा करने के लिए उनके दादा कैप्टन राजकुमार, ताऊ प्रदीप राणा व पिता जयदीप राणा ने उन्हें पूरा सहयोग दिया। उनके सहयोग के कारण से ही वे अपना सपना पूरा कर सकीं।
सिमरन ने कहा कि विदेश में जाकर उनको नया अनुभव मिला जो जीवन भर उसका मार्गदर्शन करेगा। हिंदुस्तान के मुकाबले यूरोप में शिक्षा का आधारभूत ढांचा बहुत ही सुदृढ़ व अनुभवी है। यहां एमबीबीएस करना इस समय एक मध्यम परिवार के बच्चे के लिए दिवास्वप्र बन कर रहा गया। देश में एमबीबीएस करने पर लगभग एक करोड़ रुपये खर्च आ जाता है, जो मध्यम श्रेणी के परिवार के लिए संभव नहीं है। युक्रेन जहां से उन्होंने अपनी एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की वो केवल चालीस लाख रुपये में ही पूरी हो गई। उन्होंने कहा कि यदि परिवार सक्षम है व सपना पूरा कर सकता है तो बेटियों को अवश्य ही अपने सपने को पूरा करना चाहिए। आज लड़कियां किसी भी सूरत में लड़कों से कम नहीं हैं। सिमरन के पिता जयदीप राणा ने कहा कि राजपूत समाज में बेटियों को अधिक पढ़ने का प्रचलन नहीं है। उनके दिवंगत पिता स्वर्गीय राजकुमार राणा का सपना था कि उनकी पोतियां उच्च शिक्षा हासिल कर परंपरागत सामाजिक मिथ को तोड़ें। अपने पिता की इच्छा को पूरा करने के लिए उन्होंने अपनी दो बेटियों का यूरोप के यूक्रेन में एमबीबीएस में एडमिशन करवाया।
सिमरन अपनी पढ़ाई पूरा करके स्वदेश आ गई है। यदि उसने आगामी पढ़ाई करनी है तो उसके लिए वे पूरी तरह से तैयार हैं। इस अवसर पर विजय पाल सिंह, बलिंद्र चौहान, मोहन राणा, धर्मवीर फौजी, हुक्म सिंह, प्रवीण कुमार, रवींद्र कुमार व अन्य मौजूद रहे।