संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। नवरात्र के सातवें दिन शहर के सनातन धर्म, बड़ी माता, छोटी माता मंदिर, 11 रुद्री मंदिर समेत अन्य प्रमुख मंदिरों में श्रद्धालुओं ने कतार में लगकर मां कालरात्रि की पूजा-की। सुबह से ही मंदिरों में भक्तों की भीड़ पहुंचने लगी थी। इस दौरान आरती के समय भजन-कीर्तन और जयकारों की गूंज से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
मंदिरों में श्रद्धालुओं ने मां कालरात्रि का विशेष शृंगार किया। मंदिरों को खुशबूदार फूलों जैसे गेंदे, गुलाब, कमल आदि से सजाया गया है। इसके साथ ही मंदिरों के बाहर लगी जगमगाती फैंसी झालरों ने यहां की शोभा को चार चांद लगा दिया। महिलाएं और युवतियां पारंपरिक परिधान पहनकर हाथों में थाल लिए आरती में शामिल हुईं। तो वहीं, बहुत से श्रद्धालुओं ने उपवास रखकर मां की आराधना की और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
मां कालरात्रि का स्वरूप मां दुर्गा का सातवां रूप माना जाता है। मान्यता है कि मां कालरात्रि की पूजा से भक्तों के जीवन से भय और नकारात्मक शक्तियां दूर हो जाती हैं। मां दुर्गा का यह स्वरूप शत्रुओं का नाश करती हैं और साधक को आध्यात्मिक उन्नति का आशीर्वाद देती हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दिन मां की उपासना करने से शनि दोष और ग्रह बाधाएं दूर होती हैं। मां कालरात्रि के पूजन से जीवन में आत्मविश्वास बढ़ता है और हर संकट का सामना करने की शक्ति मिलती है। हर वर्ष नवरात्रि में सातवें दिन यहां के मंदिरों में मेले जैसा माहौल देखने को मिलता है। मां की कृपा से घर में सुख-शांति बनी रहती है। मंदिर पुजारी पंडित मोहनलाल ने कहा कि मां कालरात्रि की पूजा से भय, रोग और शत्रु नष्टमां दुर्गा के सातवें स्वरूप का यह नाम उनके काजल जैसे काले रूप के कारण मिला, जो देवी पार्वती के तेज से उत्पन्न हुआ था जब उन्होंने रक्तबीज राक्षस का वध किया था और उसके रक्त को फैलने से रोका था।