कैथल। रोडवेज डिपो में ई-टिकटिंग मशीनों की कमी का असर बस संचालन और यात्रियों को मिलने वाली सेवाओं पर साफ दिखाई दे रहा है। परिचालकों की संख्या के मुकाबले डिपो में पर्याप्त मशीनें उपलब्ध नहीं होने से कई बार उन्हें मैनुअल टिकट जारी करने पड़ रहे हैं। इससे टिकटिंग प्रक्रिया प्रभावित होने के साथ परिचालकों का कार्यभार भी अधिक बढ़ गया है।
डिपो में करीब 280 परिचालक कार्यरत हैं जबकि आवश्यकता के अनुसार इतनी ही ई-टिकटिंग मशीनें होनी चाहिए। फिलहाल डिपो के पास केवल 180 मशीनें हैं। इनमें से पांच मशीनें हैप्पी कार्ड को सक्रिय करने के कार्य में लगी हुई हैं। पहले डिपो को 215 मशीनें मिली थीं, लेकिन उनमें से 35 मशीनें खराब होने के कारण मरम्मत के लिए मुख्यालय भेजी गई हैं।
अभी तक ये मशीनें वापस नहीं आई हैं और नई मशीनों की भी आपूर्ति नहीं हो सकी है। मौजूदा मशीनों में भी अधिकांश काफी पुरानी हो चुकी हैं। कई मशीनों की बैटरियां कमजोर पड़ गई हैं, जिससे उन्हें बार-बार चार्ज करना पड़ता है। कई बार मशीनें बीच में ही हैंग हो जाती हैं या टिकट प्रिंट नहीं करतीं। ऐसी स्थिति में परिचालकों को हाथ से टिकट बनाकर यात्रियों को देना पड़ता है, जिससे समय अधिक लगता है और कामकाज भी प्रभावित होता है।