कैथल। सिल्लाखेड़ा रोड पर 30 दिसंबर को ड्रेन के किनारे सूटकेस में मिले युवती के शव की 47 दिन बाद भी पहचान नहीं हो सकी है। पुलिस की तमाम कोशिशों, सीसीटीवी फुटेज की छानबीन और पड़ोसी राज्यों से संपर्क के बावजूद अब यह केस लाल डोरे वाली फाइलों में दबकर रह गया है। हालांकि पुलिस की सीआईए की टीमें इस मामले को सुलझाने में लगी हैं, पर परिणाम सिफर है। करीब डेढ़ महीने पहले ड्रेन के पास लावारिस हालत में मिले जिस दो फीट के सूटकेस ने सनसनी फैलाई थी, उसके अंदर का दृश्य रूह कंपाने वाला था। पुलिस के मुताबिक हत्या करने वालों ने करीब पांच फीट लंबी युवती की लाश को उस छोटे से सूटकेस में फिट करने के लिए उसकी हड्डियां तक तोड़ दी थीं। उन्होंने उसकी लाश को बेरहमी से पैक किया गया था, जो इस बात की ओर इशारा करता है कि कातिल सबूतों को ठिकाने लगाने की जल्दबाजी में भी थे।
इसके बाद पुलिस ने शिनाख्त के लिए हर संभव रास्ता अपनाया। घटना के बाद आसपास के सभी थानों में गुमशुदगी की रिपोर्ट खंगाली गई। सोशल मीडिया पर मृतका के हुलिए और उसके पास से मिली वस्तुओं के आधार पर सूचनाएं साझा की गईं। पुलिस की टीमों ने ड्रेन की ओर जाने वाले रास्तों पर लगे दर्जनों सीसीटीवी कैमरों को चेक किया, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। पुलिस ने आशंका जताई कि हत्या कहीं और की गई और ड्रेन के किनारे सुनसान इलाका देखकर सूटकेस को वहां फेंक दिया गया। शुरुआती जांच में यह आशंका भी जताई गई कि युवती बाहरी राज्य की हो सकती है, जिसके चलते पुलिस ने दिल्ली, पंजाब, उत्तरप्रदेश और राजस्थान पुलिस से भी संपर्क साधा, लेकिन कहीं से कोई सुराग हाथ नहीं लगा।
सीआईए जांच में जुटी
थाना शहर प्रभारी गीता ने बताया कि अभी तक युवती की पहचान नहीं हो पाई है। पुलिस की सीआईए टीमें गंभीरता से जांच में जुटी हैं। जल्द ही मामले को सुलझा लिया जाएगा।