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वाहो वाहो गोबिंद सिंह आपे गुरु चेला

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खालसा पंथ के संस्थापक श्री गुरु गोबिंद सिंह जी का प्रकाशोत्सव जिलेभर में श्रद्धा और हर्षोल्लास से मनाया गया। गुरुद्वारों में हजारों श्रद्धालुओं ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की हजूरी में माथा टेका और अरदास की। गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से शहर में भव्य नगर कीर्तन निकाला गया। नगर कीर्तन की अगुवाई परंपरागत सिख वेशभूषा में सजे पांच प्यारों ने की। संगत ने जगह जगह फूलों की बरखा कर नगर कीर्तन का स्वागत किया। शहर में मुख्य आयोजन गुरुद्वारा नीम साहिब में हुआ। सुबह हेड ग्रंथी निर्मल सिंह ने श्री अखंड साहिब का भोग पाया और शबद कीर्तन किया। गुरुद्वारा नीम साहिब से पांच प्यारों की अगुवाई में नगर कीर्तन की शुरुआत हुई। नगर कीर्तन में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को भव्य पालकी पर सुशोभित किया गया था। नगर कीर्तन में सबसे आगे चल रहे बैंडबाजे वालों ने गुरुबाणी का गुणगान किया। शहर की श्री सुखमणि सभा सोसाइटी के सदस्य शब्द कीर्तन करते हुए चल रहे थे। आगे-आगे महिलाएं झाड़ू लगाने की सेवा कर रही थी।
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नगर कीर्तन डोगरा गेट, चंदाना गेट, भगत सिंह चौक, करनाल रोड वह मटका चौक से होते हुए श्री गुरु तेग बहादुर चौक पर पहुंचा। शहर में जगह जगह धार्मिक संस्थाओं और संगत की और से लंगर लगाए गए। नगर कीर्तन में शामिल कीर्तन जत्था साहब सिंह, गुरप्रीत सिंह ने बोले सो निहाल सत श्री अकाल, वाहो वाहो गोबिंद सिंह आपे गुर चेला, मां गुजरी दे चन वरगा चन होर कोई नहीं हो सकदा शबद पेश किए। एसजीपीसी सदस्य शरणजीत सिंह सौथा ने कहा कि हमें गुरु जी के दिखाए हुए मार्ग पर चलना चाहिए। सुखबीर सिंह मांडी ने संगत को अमूत संचार कर गुरु के सिख सजने के लिए प्रेरित किया। गतका पार्टी में शामिल सिख नौजवानों ने गतका के करतब भी दिखाए। इस मौके पर बाबा पाला सिंह, एसजीपीसी मैनेजर रुपिंदर सिंह, सुरेंद्र सिंह, मनिंदर सिंह एडवोकेट समेत सैकड़ों लोग मौजूद थे।
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