सोमवार सुबह-सुबह जिला अस्पताल में अचानक आए एसिड अटैक के मरीजों को लेकर हड़कंप मच गया। चिकित्सकों ने मरीजों की देखभाल शुरू कर दी।
आपातकालीन यूनिट में बनाई गई बर्न यूनिट में इलाज शुरू किया गया। एसिड अटैक से पीड़ित दोनों मरीज दर्द से कराह रहे थे। वहीं जिस कॉलोनी में एसिड अटैक हुआ है, उस कॉलोनी के लोगों ने एक गर्भवती पर एक साथ इतने लोगों द्वारा किए गए हमले को निंदनीय बताया।
जनकपुरी कॉलोनी में आपसी झगड़े के बाद लगभग 20 लोगों द्वारा किए गए हमले के कारण दहशत फैल गई। एसिड से झुलसे कुलदीप व उसकी भाभी की हालत को देखकर हमलावर भाग खड़े हुए। बाद में कॉलोनी के लोगों ने एकत्रित होकर दोनों को बचाने के लिए प्रयास शुरू किए।
चूंकि निकट ही दूध की डेयरी थी। इसीलिए लोगों ने वहां से दूध लेकर दोनों को नहलाना शुरू कर दिया। इसके साथ-साथ निकट की एक अन्य डेयरी से दूध मंगवाया गया। करीब एक क्विंटल दूध से दोनों को नहलाने के बाद जिला अस्पताल ले जाया गया।
कॉलोनी के लोगों ने कहा कि बाहर के लोगों द्वारा इस तरह का हमला निंदनीय है। एसिड अटैक के हमले में झुलसी महिला उषा नौ महीने की गर्भवती है। जिसे देखकर आसपास की महिलाएं में गर्भ में पल रहे बच्चेे के लिए दुआएं मांगती नजर आईं। एसिड अटैक के हमले के बाद कॉलोनी में सनाटा पसारा हुआ था। महिलाएं घरों के छत पर खड़ी होकर सहमी हुई थीं।
माता-पिता ने सुधबुध खोई
सुबह झगड़े में घायल हुई रामकिशन पत्नी सोनण सामान्य अस्पताल में दाखिल थी। उसके सिर में पांच टांके लगे हुए थे। करीब 10 बजे जब रामकिशन व उसकी पत्नी अस्पताल में थे तो उन्हें पता चला कि उनकी दूध की डेयरी में बैठे बेटे कुलदीप सिंह व पुत्रवधू पर हमला कर दिया। एसिड अटैक की सूचना मिलते ही अस्पताल में दाखिल बुजुर्ग महिला व उसका पत्नी सहम गए।
देवर को बचाने के लिए आई थी आगे
बताया जा रहा है कि पीड़ित उषा अपने देवर को बचाने के लिए आई थी। डेयरी में कुलदीप अकेला बैठा था। तभी आरोपियों ने उस पर हमला कर दिया। देवर को बचाने के लिए गर्भवती उषा बीच में आई। जिसके कारण उस को भी एसिड का शिकार होना पड़ा।