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आईटीआई में अलाव सेंकते हुए थिन्नर ने पकड़ी आग, दो छात्र चपेट में

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थिनर से पकड़ी आग में दो छात्र झुलसे, बचाव में टंगी बाल्टियों में रेत नहीं तो कई फायर सिलेंडर चले ही नहीं
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आईटीआई में सुबह ठंड से बचने के लिए अलाव सेंक रहे थे कारपेंटर ट्रेड के विद्यार्थी, बचाव उपायों की दिखी खामी
फोटो नंबर-17, 18
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल।
जिला आईटीआई में शुक्रवार सुबह ठंड से बचने के लिए अलाव सेंक रहे विद्यार्थियों को थिनर के कारण लगी आग ने चपेट में ले लिया। इससे कारपेंटर ट्रेड के दो छात्र झुलस गए। दोनों को गंभीर हालत में जिला अस्पताल लाया गया। यहां से एक छात्र को पीजीआई रेफर किया गया है। सूचना मिलने पर विद्यार्थियों के परिजन भी अस्पताल पहुंच गए। इस दौरान बड़ी खामियां नजर आईं। बाल्टियों में रेत नहीं थी तो कई फायर सिलेंडर चल नहीं सके।
आईटीआई में कारपेंटर ट्रेड के विद्यार्थी शुक्रवार सुबह वर्कशॉप में अलाव सेंक रहे थे। इस दौरान कारपेंटर ट्रेड का छात्र गांव देवबन निवासी सोहन लाल ने आग में थिनर डालने का प्रयास किया तो पूरी कैन में ही आग पकड़ ली। उसने कैन को फेंकने की कोशिश की तो कैन हाथ से छूटते ही ब्लास्ट हो गई। इससे सोहन लाल बुरी तरह झुलस गया। उसकी छाती, चेहरे पर थिनर गिरने के कारण आग लग गई। वहां मौजूद 4 अन्य विद्यार्थियों के कपड़ों में भी आग लग गई।
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इसी बीच एक अध्यापक ने फायर सिलेंडर से आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन वह चला ही नहीं। इसके बाद सोहन लाल को दरी में लपेट दिया, तब जाकर आग पर काबू पाया जा सका। सोहन लाल और सुशील की हालत ज्यादा गंभीर हो गई। सोहन लाल को पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया गया।
आईटीआई के प्रिंसिपल सतीश मच्छाल ने कहा कि बच्चे आग सेंक रहे थे। इसी बीच किसी ने थिनर आग में डालने का प्रयास किया तो आग भड़क गई और बच्चा झुलस गया। उसे जिला अस्पताल लेकर गए। परिजनों को सूचित किया गया है। बच्चे को पीजीआई रेफर कर दिया गया है। दूसरे बच्चे को अस्पताल से छुट्टी मिल गई है। दोनों खतरे से बाहर हैं।

आईटीआई में आपदा प्रबंधन के आदेशों पर नहीं हुआ काम, आग लगने की घटना में सामने आई बड़ी खामियां
बाल्टियों में रेत नहीं, कई फायर सिलेंडर चल नहीं सके
कैथल। पिछले माह राज्यस्तर पर किए गए आपदा प्रबंधन के मॉक ड्रिल का शायद आईटीआई में असर कम ही हुआ है। यही कारण है कि शुक्रवार को हुए हादसे के बाद यहां कई बड़ी खामियां नजर आईं। फायर सिलेंडर काम नहीं कर रहे थे तो रेत की बाल्टियां खाली लटकी थीं।
जिला प्रशासन ने आपदा से निपटने के लिए 20 दिसंबर को मॉक ड्रिल को आयोजन कर विभिन्न सरकारी संस्थानों और अन्य जगहों पर एमरजेंसी से निपटने के प्रबंधों का जायजा लिया था। लेकिन यहां पर आपदा से निपटने के कोई प्रबंध नहीं थे। आईटीआई में जिले भर से 2,500 छात्र छात्राएं शिक्षा प्राप्त करने आते हैं। आईटीआई की वर्कशॉप में न तो फायर सिलेंडर की स्थिति ठीक थी और न ही यहां पर फायर से निपटने के लिए रखी गई बाल्टियों में रेत थी। यदि यहां पर फायर सिलेंडर चालू होते तो इस हादसे में झुलसे हुए छात्र कम आग की कम लपटों में आता। वहीं झुलसे छात्र सुनील ने कहा कि उनके परिजनों को काफी देर बाद पता चला।

फायर सिलेंडर में गैस की सुई रेडजोन में
आईटीआई में लगे फायर सिलेंडरों में से कई में सुई रेडजोन में मिली। इसमें संभवत: गैस नहीं है। तभी इसकी सुई रेडजोन में रहती है। एक इंस्ट्रक्टर ने यह भी बताया कि जो बच्चे झुलसे हैं, उनकी प्रैक्टिकल परीक्षाएं चल रही हैं। उन्हें आईटीआई में नहीं आने के लिए कहा गया है। लेकिन इसके बावजूद वे आईटीआई में आए। ये पता नहीं कि वे क्यों आए? यदि वे घर पर ही रहते तो हादसा नहीं होता।
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आईटीआई प्रिंसिपल सतीश मच्छाल ने कहा कि आईटीआई में हादसे के तुरंत बाद विद्यार्थियों को अस्पताल लेकर गए। वे स्वयं वहां गए थे। गैस सिलेंडर सहित काफी उपाय हादसों से बचाव में किए गए हैं। यदि कहीं खामी होगी, उसे भी देखा जाएगा। इसे शीघ्र ही दूर कर दिया जाएगा।
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