कैथल। 33 केवी पावर हाउस देवबन में वायरमैन के पद पर काम करने का दावा करने वाले सतीश कुमार को अदालत से राहत नहीं मिली। सिविल जज (सीनियर डिवीजन) अमन इंदर सिंह की अदालत ने उनका दावा खारिज कर दिया। यह घोषणा और स्थायी निषेधाज्ञा का दावा था, जिसे लागत सहित खारिज किया गया। फैसला 21 सितंबर को सुनाया गया।
सतीश कुमार ने अदालत में दावा किया था कि उसने 10 जून 2017 को देवबन स्थित 33 केवी पावर हाउस में वायरमैन के तौर पर काम शुरू किया था। उसने आरोप लगाया कि उसे बिना नोटिस काम से हटा दिया गया। उसकी जगह विनोद कुमार को काम पर लगा दिया गया था।
सतीश कुमार ने खुद को विनोद कुमार से अधिक योग्य और अनुभवी बताते हुए काम पर रखने का अधिकार मांगा था। यूएचबीवीएन ने अदालत को बताया कि पावर हाउस के संचालन और रखरखाव का काम ठेके पर दिया गया था। कर्मचारियों की नियुक्ति ठेकेदार अपने स्तर पर करता था। विभाग के रिकॉर्ड और हाजिरी में सतीश कुमार का नाम नहीं मिला।
अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि वादी सतीश कुमार अपनी वैध नियुक्ति साबित नहीं कर सका। वह कोई नियुक्ति पत्र, अनुबंध या अन्य आवश्यक दस्तावेज पेश नहीं कर पाया। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल किसी हाजिरी या कार्य संबंधी रिकॉर्ड में नाम होने से कानूनी नियुक्ति का अधिकार साबित नहीं होता।