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मुख्यमंत्री मनोहर लाल आज महारुद्र यज्ञ में डालेंगे आहुती

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05-कैथल। मुख्यमंत्री मनोहर लाल के आगमन को लेकर श्री ग्यारहरूद्री शिव मंदिर परिसर में निरीक्षण करत - फोटो : Kaithal
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कैथल। श्री ग्यारह रुद्री शिव मंदिर में महारुद्र यज्ञ के तीसरे दिन काशी से आए विद्वानों ने यजमानों से आहुतियां डलवाईं। वहीं जिले के सैकड़ों लोगों ने यज्ञशाला की परिक्रमा की। बता दें कि महामंडलेश्वर स्वामी यतिंद्रानंद की अगुवाई में महारुद्र यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल भी आज 11 बजे महारुद्र यज्ञ में आहुति डालने पहुंचेंगे। उनके साथ स्थानीय निकाय मंत्री डॉ. कमल गुप्ता भी महारुद्र यज्ञ में शामिल होंगे। सीएम के दौरे को देखते हुए शुक्रवार को डीसी प्रदीप दहिया और एसपी मकसूद अहमद ने भी मंदिर परिसर का निरीक्षण किया। ये जानकारी मंदिर सभा के प्रधान विनोद मित्तल ने दी।
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महासचिव डॉ. राजेश गोयल ने बताया कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने महारुद्र यज्ञ में भाग लेने की सहमति देते हुए शनिवार को पहुंचने का कार्यक्रम बनाया है। वे 11 बजे मंदिर परिसर में पहुंचेंगे। पहले यज्ञशाला की परिक्रमा करेंगे। इसके बाद श्री ग्यारह रुद्री मंदिर में ग्यारह रुद्रों का अभिषेक करेंगे। उनके दौरे से पूर्व डीसी प्रदीप दहिया, एसपी मकसूद अहमद व भाजपा जिला अध्यक्ष अशोक गुर्जर ने मंदिर परिसर का निरीक्षण किया है। शनिवार को ही स्थानीय निकाय मंत्री डॉ. कमल गुप्ता भी महारुद्र यज्ञ में पहुंचेंगे। शुक्रवार को सिविल जज कैथल अश्वनी गुप्ता व सिविल जज प्रमोद कुमार, जिला परिषद सीईओ सुरेश राविश व डिप्टी सीईओ अमित कुमार ने महारुद्र यज्ञ में पहुंच कर स्वामी यतिंद्रानंद जी से आशीर्वाद लिया और यज्ञशाला की परिक्रमा की। उन्होंने कहा कि मंदिर सभा के सभी सदस्यों द्वारा यहां हर संभव सहयोग किया जा रहा है। प्रधान विनोद मित्तल और महासचिव डॉ. राजेश गोयल ने बताया कि यज्ञशाला के चारों ओर परिक्रमा करने वाले श्रद्धालुओं की भी भीड़ बढ़ रही है। लोगों का इस महारुद्र यज्ञ में खूब सहयोग मिल रहा है। मंदिर सभा की कामना है कि यह यज्ञ सभी के लिए कल्याणकारी हो।
ये रहे शुक्रवार के यजमान-
घी की सामग्री डालने वालों में कुलदीप गर्ग, नरेश बरोट, मुकेश जिंदल, राजीव सिंगला, अनिल मित्तल, नरेश गोयल व सामग्री से आहुति डालने वालों में पवन कुमार, सत्यनारायण, रमेश गर्ग जींद, सोहन लाल, नीरज गोयल, राजेश सैनी, विशाल सैनी, ईश्वर मास्टर, दीपक मित्तल, रमेश गर्ग, राजेंद्र गुप्ता, सुरेंद्र गर्ग, ऋषिपाल गर्ग, ईश्वर दलाल, प्रवीण अरोड़ा, विक्रांत सैनी, पप्पू्र सुरेश मित्तल, राजेश सैनी,, तरसेम मित्त, संजीव चौधरी, सुनील कुमार गर्ग शामिल रहे।
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भगवान शिव के गले की 108 मुंडमाला में सभी सिर माता पार्वती के-महामंडलेश्वर
तीसरे दिन की कथा में दी यतिंद्रानंद जी ने जानकारी
कैथल। श्री ग्यारह रुद्री शिव मंदिर में आयोजित की जा रही शिव कथा में श्री महारुद्र यज्ञ के तहत अनंत श्री विभूषित वरिष्ठ महामंडलेश्वर जूना अखाड़ा योगी यतींद्रानंद जी महाराज ने शिवचरित्र में शिव के विवाह और पुत्र पुत्रियों के संबंध में बताया।
उन्होंने प्रवचनों में कहा कि एक बार नारद जी के उकसाने पर सती भगवान शिव से जिद करने लगीं कि आपके गले में जो मुंड की माला है, उसका रहस्य क्या है। शिव ने पार्वती से कहा कि इस मुंड की माला में जितने भी मुंड यानी सिर हैं, वह सभी आपके हैं। सती इस बात का सुनकर हैरान रह गईं। सती ने भगवान शिव से पूछा, यह भला कैसे संभव है कि सभी मुंड मेरे हैं। इस पर शिव बोले यह आपका 108वां जन्म है। इससे पहले आप 107 बार जन्म लेकर शरीर त्याग चुकी हैं और ये सभी मुंड उन पूर्व जन्मों की निशानी है। इस माला में अभी एक मुंड की कमी है, इसके बाद यह माला पूर्ण हो जाएगी। शिव की इस बात को सुनकर सती ने शिव से कहा वे बार-बार जन्म लेकर शरीर त्याग करती हैं, लेकिन आप शरीर त्याग क्यों नहीं करते। शिव हंसते हुए बोले वे अमर कथा जानते हैं, इसलिए उन्हें शरीर का त्याग नहीं करना पड़ता। इस पर सती ने भी अमर कथा जानने की इच्छा प्रकट की। शिव जब सती को कथा सुनाने लगे तो उन्हें नींद आ गयी और वह कथा सुन नहीं पाईं। इसलिए उन्हें दक्ष के यज्ञ कुंड में कूदकर अपने शरीर का त्याग करना पड़ा। शिव ने सती के मुंड को भी माला में गूंथ लिया। इस प्रकार 108 मुंड की माला तैयार हो गई। सती ने अगला जन्म पार्वती के रूप में हुआ। इस जन्म में पार्वती को अमरत्व प्राप्त हुआ। संतान के संबंध में भगवान शिव की 6 संतानें हैं। इनमें तीन पुत्र हैं और 3 पुत्रियां भी हैं। इनका वर्णन शिव पुराण में मिलता है। भगवान शिव के तीसरे पुत्र का नाम गणेश जी, कार्तिकेय जी और भगवान अयप्पा हैं। दक्षिण भारत में इनको पूरी श्रद्धा के साथ पूजा जाता है। वहीं शिव की तीनों पुत्रियों के नाम अशोक सुंदरी, ज्योति या मां ज्वालामुखी और देवी वासुकी या मनसा हैं। हालांकि तीनों बहनें अपने भाइयों की तरह बहुत चर्चित नहीं हैं, लेकिन देश के कई हिस्सों में इनकी पूजा की जाती है।
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