संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिले में दो दिन पहले अचानक हुई बारिश व ओलावृष्टि के बाद तीसरे दिन शनिवार को भी मौसम में एक बार फिर से बदलाव आया। इस दौरान पूरा दिन ठंडी हवाएं चली। इस कारण लोगों की परेशानी बढ़ी। हालांकि दिन के समय धूप तो खिली, लेकिन ठंडक बढ़ने से लोगों गर्म कपड़े से ढके दिखे।
वीरवार व शुक्रवार को हुई बारिश से किसानों के चेहरे पर मायूसी थी। इससे उनकी खेतों में खड़ी रबी की फसलों को नुकसान की स्थिति पैदा हुई है। हालांकि ज्यादा बारिश न होने से अब तक स्थिति सामान्य है, जिससे किसी प्रकार से फसलों को ज्यादा क्षति नहीं हुई है। पिछले एक सप्ताह से मौसम में लगातार बदलाव कि स्थिति बनी हुई थी।
महज पांच दिन पहले बढ़े तापमान के बीच दोपहर के समय धूप में बैठना मुश्किल हो रहा था लेकिन मौसम ने पलटी मार दी। उत्तरी पश्चिम विक्षोप के चलते पहाड़ी इलाकों में कई दिनों से सर्द हवाएं व बारिश होने के चलते यहां मैदानी क्षेत्र में तेज हवाएं चलनी शुरू हुई। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले दो से तीन दिनों में अभी भी बारिश होने व तेज हवाएं चलने का अनुमान है। अधिकतम तापमान 25.1 और न्यूनतम तापमान में भी दो डिग्री की गिरावट के बाद 10.2 डिग्री सेल्सियस रहा। आगामी दो दिनों तक तेज हवाएं चलने का अनुमान है।
चल रहीं ठंडी हवाएं ः कृषि विज्ञान केंद्र के मुख्य समन्वयक डॉ. रमेश चंद्र वर्मा ने बताया कि पिछले तीन दिनों से 15 से 20 किलोमीटर की गति से हवाएं चल रही है। इस कारण किसानों की खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान हुआ है, जिससे किसान चिंतित है। सरसों, गेंहू, तिलहन, चना, ज्वार की फसल ओलावृष्टि से सफेद चादर में बिखर गई थी। जिले के कलायत व राजौंद के कुछ इलाकों में तेज हवाएं व बारिश के कारण कई क्षेत्रों में गेहूं व सरसों की फसल गिर गई थी।
ओलावृष्टि से खेतों में हुए नुकसान की भरपाई मांगी
पाई। भाकियू ने प्रदेश सरकार से अनचाही बरसात व ओलावृष्टि से खेतों में हुए नुकसान भरपाई के लिए तत्काल मुआवजा देने की मांग की है। किसान यूनियन के राष्ट्रीय सलाहकार अजीत सिंह हाबडी व भाकियू के कार्यकारी प्रधान बलवान पाई ने बताया कि अबकी गेहूं व सरसों की फसल अच्छी थी पर बारिश व ओला वृष्टि से नुकसान हो गया।
उन्होंने कहा कि तेज हवाओं से फसल जमीन पर बिछ गई है। बताया कि किसान पहले ही कर्जमंद है और अब फसल बर्बाद होने से किसानों को बहुत भारी नुकसान झेलना पड़ेगा। उन्होंने सरकार से मांग की है कि सरकार विशेष गिरदावरी करवाए और कम से कम 40 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा देने की घोषणा करे। संवाद