संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। सरकारी स्कूलों के अध्यापकों की जनगणना ड्यूटी को लेकर अभिभावकों में चिंता बढ़ गई है। उनका कहना है कि पहले से ही शिक्षकों की कमी झेल रहे स्कूलों में अब बड़ी संख्या में अध्यापकों की ड्यूटी जनगणना कार्य में लगने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है।
अभिभावक रामकिशन, सरोज, रामरती और जोगेंद्र का कहना है कि एक ओर स्कूलों में शिक्षकों की संख्या पहले ही कम है, वहीं दूसरी ओर लंबे समय तक चलने वाला जनगणना अभियान स्थिति को और गंभीर बना सकता है। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका है।
उन्होंने बताया कि अधिकांश शिक्षकों को जनगणना कार्य में लगा दिया गया है, जबकि नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो चुका है। अभिभावक बच्चों के दाखिले के लिए स्कूलों में पहुंच रहे हैं, लेकिन यदि शिक्षक ही उपलब्ध नहीं होंगे तो सरकारी स्कूलों में नामांकन कैसे बढ़ेगा।
अभिभावकों के मन में यह सवाल भी है कि जनगणना कार्य स्कूल समय में होगा या उसके बाद। सरकारी निर्देशों के अनुसार गणनाकारों को प्रतिदिन 125 घरों का सर्वे करना है। यह कार्य समय लेने वाला और समयबद्ध है, ऐसे में इसे सुबह-शाम सीमित समय में पूरा करना मुश्किल माना जा रहा है। इसी कारण अभिभावकों को चिंता सता रही है कि क्या अध्यापक निर्धारित समय में बच्चों का सिलेबस पूरा करवा पाएंगे।
कलायत के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक कन्या विद्यालय में कुल 25 का स्टाफ है, जिनमें से 9 अध्यापकों की ड्यूटी जनगणना कार्य में लगाई गई है। स्कूल के प्रधानाचार्य डॉ. रामगोपाल शर्मा ने बताया कि कार्यशैली को लेकर उन्हें अभी तक कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं मिले हैं। जिन अध्यापकों की ड्यूटी लगाई जाती है, उनके मोबाइल फोन पर ही सूचना भेजी जा रही है।
अपरिहार्य सेवा है जनगणना कार्य : सुरेश नैन
खंड शिक्षा अधिकारी सुरेश नैन ने बताया कि प्रशासनिक निर्देशों के अनुसार शिक्षकों को पढ़ाई को प्राथमिकता देने के लिए कहा जाता है, लेकिन जनगणना कार्य को जनगणना अधिनियम 1948 के तहत अपरिहार्य सेवा माना गया है। इसलिए शिक्षकों की इसमें भागीदारी अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि जनगणना कार्य को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए आवश्यकता पड़ने पर स्कूलों के समय में बदलाव किया जा सकता है।
उन्होंने जानकारी दी कि कलायत में 9 अप्रैल से प्रशिक्षण शिविर शुरू हो रहे हैं। इन शिविरों के दौरान जनगणना और शिक्षण कार्य के बीच तालमेल को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए जाएंगे। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे घबराएं नहीं, बच्चों की शिक्षा प्रभावित नहीं होने दी जाएगी।