संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ (संबद्ध सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा) एवं स्कूल टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया की जिला स्तरीय सम्मेलन जवाहर पार्क में आयोजित हुआ। इसमें शिक्षकों की विभिन्न समस्याओं पर गहन चर्चा की गई और सार्वजनिक शिक्षा के ढांचे को कमजोर करने के प्रयासों का कड़ा विरोध किया गया। राज्य महासचिव रामपाल शर्मा ने कहा कि सार्वजनिक शिक्षा पर किसी भी तरह का हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जरूरत पड़ी तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
कन्वेंशन में संगठन की जनवादी कार्यप्रणाली पर यमुनानगर के जिला प्रधान संजय कंबोज ने भी अपनी बात रखी। दोनों वक्ताओं ने कहा कि नई शिक्षा नीति-2020 की आड़ में सरकार शिक्षा के सार्वजनिक ढांचे को लगातार सीमित कर रही है। सरकारी स्कूलों में सभी विषयों और प्राथमिक स्तर पर सभी कक्षाओं में अध्यापकों की नियुक्ति सुनिश्चित की जानी चाहिए।
शिक्षकों ने विधानसभा सत्र का हवाला देते हुए कहा कि 2 मार्च 2025 को शिक्षा मंत्री द्वारा दिए गए जवाब के अनुसार प्रदेश में 15,659 शिक्षकों के पद खाली हैं, लेकिन अब राशनलाइजेशन के नाम पर इनमें से 14,455 पद समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसी नीति के तहत हरियाणा कौशल रोजगार निगम के तहत कार्यरत अध्यापकों को हटाया गया था, जिनकी संगठन के दबाव में विभाग में वापसी करवाई गई।
वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने संगठन से शीघ्र बातचीत कर सार्वजनिक शिक्षा को नुकसान पहुंचाने वाले नॉर्म्स में बदलाव नहीं किया, तो आंदोलन को तेज किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी। कन्वेंशन की अध्यक्षता जिला प्रधान रामफल दयोहरा ने की, जबकि संचालन जिला सचिव अमरनाथ किठानिया ने किया।
उपप्रधान कपिल सिरोही, जिला प्रधान ओमपाल भाल, जिला सचिव
शिवचरण, वरिष्ठ उपप्रधान छज्जू राम, हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ की जिला वरिष्ठ उपप्रधान विद्यावती, सहसचिव शमशेर कालिया, कृष्ण आर्य, सतपाल पांचाल, जोगिंद्र सिंह,
सोनिया, विद्या देवी, सुरेंद्र पहलवान, विक्की टांक, पवन कुमार व अमित कुमार सहित बड़ी संख्या में अध्यापक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।