22-कैथल। जिला नागरिक अस्पताल में विश्व मच्छर दिवस पर आयोजित गोष्ठी में भाग लेते हुए स्वास्थ्य कर्?
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आमतौर पर मच्छर का डंक या काटना शब्द का उपयोग किया जाता है। यह सत्य है कि मच्छर के दांत नहीं होते, बल्कि मच्छर काटने की बजाय खून चूसता है। उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन के हवाले से बताया कि मलेरिया विश्व स्तर पर अनुमानित 219 मिलियन मामलों का कारण बनता है। इसके चलते हर साल 4 लाख से अधिक मौतें होती हैं। विश्व मच्छर दिवस पर जिला नागरिक अस्पताल में आयोजित गोष्ठी में जिला नागरिक अस्पताल के प्रधान चिकित्सा अधिकारी डॉ. शैलेंद्र ममगाईं शैली ने कहा कि डेंगू लगभग 96 मिलियन रोग सूचक मामलों और हर साल अनुमानित 40 हजार मौतों के लिए जिम्मेदार है।
डॉ. ममगाईं ने बताया कि मच्छर मनुष्य को काटने के बाद मर जाता है और मादा मच्छर बार-बार काट सकती है। इसके कारण होने वाला मलेरिया एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में संचारित होता है। छोटा डंक बड़ा खतरा पैदा कर सकता है और मच्छर का काटना घातक हो सकता है। मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, जापानी बुखार, फाइलेरिया, जीका और पीत ज्वर जैसी बीमारी के कारण जीवन को गंभीर खतरा भी हो सकता है। डॉ. शैली ने जनता से अपील की कि वे मच्छरों के काटने से बचाने वाली क्रीम का उपयोग करें। हाथों-पैरों को ढककर रखने वाले कपड़े ही पहनें, सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें। इसके अलावा अपने आसपास मच्छरों की प्रजनन भूमि वाले स्थानों में पानी इकट्ठा न होने दें।
सर रोनाल्ड रॉस ने की थी खोज
प्रतिवर्ष संपूर्ण विश्व में 20 अगस्त को विश्व मच्छर दिवस मनाया जाता है। इस दिवस का थीम है रिचिंग द जीरो मलेरिया टारगेट। यह दिवस पेशेवर चिकित्सक सर रोनल्ड रॉस की स्मृति में मनाया जाता है। मनुष्य में मलेरिया जैसी जानलेवा बीमारी के संचरण के लिए मादा मच्छर जिम्मेदार है, इसकी खोज 1897 में की थी।