जिला परिषद के माध्यम से जनप्रतिनिधियों के कार्यकाल समाप्त होने से कुछ दिन पहले खर्च की गई ग्रांट को लेकर डीसी को शिकायत की गई है। शिकायत करने वाले लोगों ने इस ग्रांट के खर्च करने में गड़बड़ी का आरोप लगाया है। डीसी ने कहा कि मामले की जांच करवाई जाएगी।
शिकायतकर्ता गांव जुलानीखेड़ा निवासी संदीप, नरड़ निवासी कुलबीर सिंह, जाखौली निवासी बलवान सिंह ने डीसी को दी शिकायत में कहा कि 15.50 करोड़ की ग्रांट में गलियों, नालियों का काम बताया गया है। लेकिन इस ग्रांट से काम हुए हैं या नहीं, यह भी पता नहीं है। जिला परिषद में आई ग्रांट की बंदरबांट की गई है। गांवों में नाले व खालों की सफाई के नाम, ठोस कचरा व तरल कचरा हटाने व उठाने के लिए 10 लाख से नीचे के एस्टीमेट बनाकर हड़प लिए गए। शिकायत में कहा गया है कि जिला परिषद में 31 करोड़ रुपये की ग्रांट आई थी। जिसमें टाईड व अनडाईड फंड के माध्यम से खर्च किया जाना था। इस ग्रांट का दुरुपयोग किया गया है। इन लोगों ने कहा कि एक या दो फर्मों को ही बिलों की अदायगी कर दी गई। धरातल पर कोई काम नहीं हुआ। इन लोगों ने आरोप लगाया कि सीधा घोटाला हुआ है। 1 करोड़ 60 लाख रुपये स्वच्छता अभियान के स्कूलों में रंग रोगन करने के नाम पर हड़प लिए गए। एक ही ेफर्म को पेमेंट की गई। ब्लॉक समितियों में अनडाइड ग्रांट को भी डकार लिया गया। जो लगभग इतनी ही ग्रांट आई थी। राजौंद व कलायत ब्लॉकों में फर्जी बिल एक या दो फर्मों के बनाए गए। तालाब खुदाई के नाम पर भी घोटाला किया गया है।
इस संबंध में डीसी सुजान सिंह यादव का कहना है कि शिकायत मिली है। मामले की सक्षम अधिकारियों से जांच करवाई जाएगी।
पूर्व मुख्य संसदीय सचिव रामपाल माजरा ने ने कहा कि पूर्व की भांति अब नया घोटाला सामने आया है। शासन-प्रशासन की मिलीभगत से घोटाले हो रहे हैं। जिला परिषद के माध्यम से खर्च की गई करोड़ों रुपये की ग्रांट में अनियमितता सामने आई है। पूरे मामले की जांच करवाई जाए तो बड़े-बड़े लोगों की संलिप्तता सामने आएगी। इसीलिए इस मामले की भी जांच करवाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि रिचार्ज बोर के नाम पर, सफाई के नाम पर व तालाबों की खुदाई के नाम पर भी बड़े घोटाले यहां हो रहे हैं।