फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अपने पिता की कपड़े की दुकान का सारा विदेशी माल

विज्ञापन
विज्ञापन
कैथल। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रेरणा से देश में करोड़ों स्वतंत्रता सेनानियों ने आजादी के संघर्ष में अपना योगदान दिया। इन्हीं में कैथल से लाला महाश्य काका राम का नाम उस समय के बड़े कांग्रेसी नेताओं में शुमार था और उन्होंने महात्मा गांधी जी के विचारों से प्रभावित होकर पांच बार जेल यात्रा की। उनके साथ कैथल से नराता राम व देवीदयाल ठठेरा ने भी बढ़-चढ़कर आंदोलनों में भाग लिया। महाश्य काका राम गांधी जी के विचारों से इतना प्रभावित थे कि उन्होंने अपने पिता की कपड़े की दुकान से सारा विदेशी माल निकालकर पुरानी मंडी के गेट पर आग लगा दी थी।
विज्ञापन

कैथल जिले में आजादी से पहले कई बड़े स्वतंत्रता सेनानी हुए हैं। 15 अप्रैल 1896 को कैथल में उस समय के धनाड्य सूत व्यापारी के घर में जन्मे लाला महाश्य काका राम बड़े स्वतंत्रता सेनानी हुए हैं। वे गांधी जी के विचारों से प्रभावित हुए और 1916 में एनी बेसेंट के होम रूल आंदोलन से उन्होंने आजादी के संघर्ष में भाग लेना शुरू किया। 1919 में जलियांवाला बाग कांड के विरोध में उन्होंने लोगों का नेतृत्व करते हुए रेल रोकी। उनके साथ देवीदयाल ठठेरा, महाश्य हंसराज, लाला फग्गू राम, नराता राम भल्ला भी आंदोलन में शामिल रहे। 1920 में असहयोग आंदोलन में उन्हें गिरफ्तार भी किया गया। उसी समय कैथल में गठित हुई कांग्रेस इकाई में वे संगठन सचिव व महामंत्री बने।
सविनय अवज्ञा आंदोलन में जब विदेशी कपड़ों के बहिष्कार की बात की जा रही थी तो महाश्य काका राम ने पुरानी मंडी के निकट अपने पिता की कपड़ों की दुकान में से सारा विदेशी माल बाहर निकालकर आग के हवाले कर दिया था। उस समय भी वे जेल में गए। इसके बाद 1937 में भी उन्हें हैदराबाद में गिरफ्तार किया गया। इसके बाद भारत छोड़ो आंदोलन में उन्हें गिरफ्तार कर लाहौर जेल में ले जाया गया। जहां उन्होंने कैदियों के लिए अच्छे भोजन की मांग को लेकर छह दिन तक हड़ताल की। जब उनकी हालत बिगड़ने लगी तो अंग्रेज पुलिस कैथल आकर उनकी पत्नी व बेटी को लेकर गई। उनके कहने पर व कैदियों के खाने में सुधार की बात पर महाश्य काका राम ने भूख हड़ताल समाप्त की। आजादी के बाद जब पाकिस्तान से कैथल में शरणार्थी आए तो उन्होंने पूरे परिवार के साथ उनकी कपड़ों व भोजन की व्यवस्था कर मदद की।
विज्ञापन

इसी प्रकार से उनके साथी नराता राम भल्ला भी अच्छे परिवार से थे। उन्हें भी गांधी जी के विचारों से प्रभावित होकर चले आंदोलन में भाग लेने के लिए तीन साल की सजा हुई थी। 1930 में कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष जेबी कृपलानी, राजकुमारी अमृत कौर व सरोजिनी नायडू जैसे नेता कैथल आए थे।
इसके अलावा 1875 में जन्मे देवीदयाल ठठेरा ने भी आजादी के आंदोलन में गांधी जी के संघर्ष में अहम योगदान दिया। वे भी कई बार जेल में गए। वे महाश्य काका राम के साथ मिलकर आजादी के आंदोलन में काम करते रहे। उनके लिए लाहौर में कांग्रेस की बहिष्कार कमेटी ने रोहतक कांग्रेस को पत्र लिखकर अच्छा काम करने पर उनकी मदद के लिए कहा था। यह पत्र आज भी उनके परिवार के पास मौजूद है।
यह सारी जानकारी इतिहासकार आरकेएसडी कॉलेज में प्रोफेसर रहे प्रो. बीबी भारद्वाज ने अमर उजाला के साथ साझा करते हुए कहा कि आजादी के दिन महाश्य काका राम ने छज्जू कुंड में तिरंगा लहराया था। वे कैथल ही नहीं कुरुक्षेत्र, पानीपत व करनाल या यूं कहें कि पुराने करनाल जिले में सबसे बड़े स्वतंत्रता सेनानी थे। जिन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के विचारों से प्रभावित होकर आजादी के लिए संघर्ष किया। 1978 में उनका देहांत होने पर शहर में बड़ी शोकयात्रा निकाली गई थी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें