कैथल। अक्षय तृतीया का पावन पर्व रविवार को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। शहर के सभी प्रमुख मंदिरों में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। मंदिरों की विशेष रूप से साफ-सफाई कर आकर्षक सजावट की गई है जिससे श्रद्धालु भक्तिभाव के साथ पूजा-अर्चना कर सकें। शहर के कई मंदिरों 11 रुद्री मंदिर, हनुमान वाटिका सहित अन्य धार्मिक स्थलों पर सुबह से ही पूजा-अर्चना का दौर शुरू हो जाएगा। श्रद्धालु सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण कर मंदिरों में पहुंचेंगे और विधि-विधान से भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी तथा कुबेर की पूजा करेंगे।
बड़ी देवी मंदिर के पुजारी शिव चरण ने बताया कि यहां भी इस दिन के लिए तैयारी पूरी कर ली गई है। उन्होंने कहा कि धार्मिक मान्यता अनुसार अक्षय तृतीया को अत्यंत शुभ तिथि माना जाता है। कहा जाता है कि इस दिन किए गए जप, तप, दान और पूजन का फल कभी समाप्त नहीं होता। इसी कारण इस तिथि को अक्षय कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व होता है, जिससे घर में सुख-समृद्धि और धन-धान्य की वृद्धि होती है। पूजा में चंदन, अक्षत, पीले फूल, तुलसी दल और भोग अर्पित किए जाएंगे। मंदिरों में इस दिन विशेष हवन-यज्ञ का आयोजन भी किया जाएगा। श्रद्धालु यज्ञ में आहुति देकर परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना करेंगे। इसके साथ ही कई स्थानों पर भंडारों का आयोजन किया जाएगा, जहां श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में भोजन वितरित किया जाएगा।
हनुमान वाटिका के पुजारी विशाल ने बताया कि अक्षय तृतीया के दिन भगवान परशुराम की जयंती भी मनाई जाती है। इसी दिन त्रेतायुग का आरंभ हुआ था और महाभारत काल में पांडवों को अक्षय पात्र की प्राप्ति हुई थी, जिससे उन्हें कभी अन्न की कमी नहीं हुई। इस दिन दान-पुण्य का भी विशेष महत्व है। जरूरतमंदों को अन्न, जल से भरे घड़े, वस्त्र, छाता और सत्तू का दान करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा गोसेवा और गरीबों को भोजन करवाना भी पुण्य का कार्य माना गया है। मंदिर प्रबंध समितियों ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पेयजल, प्रसाद वितरण और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं।