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अक्षय तृतीया पर विशेष : बाजार में बढ़ी रौनक, बर्तनों की दुकानों पर लगी भीड़

Sun, 19 Apr 2026 03:16 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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अक्षय तृतीया के लिए सजाया गया कैथल का बड़ी देवी मंदिर।
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कैथल। सनातन परंपरा में अत्यंत शुभ मानी जाने वाली अक्षय तृतीया रविवार को मनाई जाएगी। पर्व की खरीदारी के शनिवार को तलाई बाजार और मुख्य बाजार सहित अन्य बाजार में बर्तन की दुकानों पर काफी संख्या में लोग पहुंचे मान्यता है कि इस दिन खरीदी गई वस्तुएं अक्षय फल देती हैं, इसलिए लोग सोना-चांदी के साथ-साथ बर्तन, कपड़े और अन्य उपयोगी सामान खरीदना शुभ मानते हैं।
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बाजार में दुकानदारों ने अक्षय तृतीया पर ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए विशेष तैयारियां की हैं। कई दुकानों पर आकर्षक छूट और नए डिजाइनों के बर्तन उपलब्ध कराए गए हैं। धार्मिक दृष्टि से इस दिन का विशेष महत्व है। बड़ी देवी मंदिर के पुजारी शिवचरण ने बताया कि अक्षय तृतीया के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा का विशेष फल मिलता है। इस दिन किए गए पुण्य कार्य, दान और जप-तप का फल कभी क्षय नहीं होता, इसलिए इसे ‘अक्षय’ तृतीया कहा जाता है। उन्होंने बताया कि प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण कर भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी तथा कुबेर की विधिवत पूजा करनी चाहिए। पूजा में पीले फूल, चंदन, अक्षत और तुलसी दल अर्पित करना शुभ माना जाता है।


11 रुद्री मंदिर के पुजारी मुनींदर मिश्रा ने बताया कि इस दिन भगवान परशुराम की जयंती भी मनाई जाती है। उन्होंने कहा कि अक्षय तृतीया पर जल से भरे घड़े, छाता, वस्त्र, अन्न और सत्तू का दान करना विशेष पुण्यदायी होता है। इसके अलावा जरूरतमंदों को भोजन करवाना और गाय को हरा चारा खिलाना भी शुभ माना गया है।
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उन्होंने बताया कि पूजा के दौरान ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करना लाभकारी रहता है। जो लोग व्रत रखते हैं, उन्हें दिनभर सात्विक आहार ग्रहण करना चाहिए और शाम को भगवान की आरती के बाद व्रत खोलना चाहिए।

यह है मान्यता
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन सतयुग और त्रेतायुग का आरंभ हुआ था। इसके अलावा महाभारत काल में अक्षय पात्र की प्राप्ति भी इसी तिथि को हुई थी, जिससे पांडवों को कभी अन्न की कमी नहीं हुई। इसी कारण यह दिन अक्षय पुण्य और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। अक्षय तृतीया को लेकर शहरवासियों में खासा उत्साह है। लोग न केवल खरीदारी कर रहे हैं बल्कि पूजा-पाठ और दान-पुण्य के जरिए इस दिन को विशेष बनाने की तैयारी में जुटे हैं। संवाद

अक्षय तृतीया के लिए सजाया गया कैथल का बड़ी देवी मंदिर।

अक्षय तृतीया के लिए सजाया गया कैथल का बड़ी देवी मंदिर।

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