कैथल। द केंद्रीय सहकारी बैंक के कर्मचारियों की भर्ती मामले में तत्कालीन जीएम, बैंक प्रबंधकों और आउटसोर्स एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई करने समेत भर्ती संबंधित टेंडर को रद्द करने की सिफारिश की गई है। इस संदर्भ में गांव अटैला निवासी बैंक में पूर्व कर्मचारी रहे युवक ने सीएम विंडो पर दी गई शिकायत दी थी। जिसके बाद इस मामले में जांच चली और इसमें रजिस्ट्रार ने तत्कालीन जीएम को नियमों की अनदेखी कर भर्ती करने, बिना लिखित आदेश के कर्मचारियों को ज्वाइन करवाने वाले बैंक प्रबंधकों के खिलाफ कार्रवाई करने, संबंधित आउटसोर्स एजेंसी को ब्लैक लिस्ट करने और उस एजेंसी का टेंडर रद्द करने की सिफारिश की है। साथ ही भर्ती किए गए कर्मचारियों को कौशल विकास निगम में शामिल करते हुए उनका रोजगार बनाए रखने की सिफारिश भी की है।
गांव अटैला निवासी सुल्तान ने बताया कि उन्होंने इस मामले में एक शिकायत की थी, उसे मिलीभगत के चलते बंद कर दिया गया था। इसके बाद उन्होंने फिर शिकायत की, जिसमें 28 सितंबर 2021 को सरकार द्वारा किसी भी तरह की आउटसोर्सिंग भर्ती पर रोक लगाने के बावजूद बैंक में भर्ती करने, बिना कागजात की जांच किए नौकरी पर रखने, शाखा प्रबंधकों द्वारा कोई डिमांड न करने, जीएम द्वारा कर्मचारियों की ज्वाइनिंग के बारे में कोई लिखित आदेश जारी न करने सहित कई आरोप लगाए गए थे। इन आरोपों पर कोऑपरेटिव सोसाइटी के रजिस्ट्रार जितेंद्र कौशिक ने जांच कर सीएम विंडो पर शिकायत अपलोड की है।
जांच में इंगित बिंदु
- तत्कालीन महाप्रबंधक ने आंख मूंदकर बिना जांच पड़ताल किए नियुक्ति के आदेश रिसीव किए और शाखा प्रबंधकों को नियुक्ति के दिशा निर्देश मुख्यालय व शाखाओं में एजेंसी द्वारा भेजे गए कर्मचारियों को ज्वाइन करवा लिया गया। इस लापरवाही में उनके खिलाफ हरको बैंक कर्मचारी सेवा अधिनियम 1988 के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जानी बनती है।
- 23 सितंबर 2021 से 28 सितंबर 2021 तक जिन शाखा प्रबंधकों व मुख्यालय स्तर के कर्मचारियों ने बिना मुख्यालय के निर्देशों और बिना नियुक्ति पत्र रिसीव किए कर्मचारियों को ज्वाइन करवाना उनके कर्तव्यों में लापरवाही दर्शाता है। इसीलिए सभी संबंधित के खिलाफ कर्मचारी सेवा नियम 1975 के तहत कार्रवाई बनती है।
- एक आउटसोर्स एजेंसी के संचालक द्वारा जांच में कोई दस्तावेज प्रस्तुत न करना व बिना बैंक के नियुक्ति स्थान बताए बगैर नियुक्ति पत्र देना उनकी लापरवाही को दर्शाता है। एजेंसी के टेंडर को रद्द किया जाना बनता है। एजेंसी की सिक्योरिटी जब्त की जाए व बैंक के स्तर पर सभी कर्मचारियों के ईपीएफ व ईएएसआई खातों को एजेंसी से पूर्ण करवाया जाए। इसके अतिरिक्त एजेंसी को ब्लैक लिस्ट किया जाए।
- प्रक्रिया में भर्ती किए गए कर्मचारियों के रोजगार को देखते हुए उनके कागजात की जांच कर उन्हें कौशल विकास निगम में पंजीकृत करवाया जाए।
विजिलेंस से जांच करवाने की मांग
अमर उजाला में 23 अक्तूबर 2021 को यह मामला प्रकाशित किया गया था, जिसमें बताया गया था कि सहकारी बैंक में भर्ती के लिए चल रही है जुगत, बैंक प्रबंधकों ने आदेशों का हवाला देकर कर्मचारियों को ज्वाइन करवाने से इंकार कर दिया था। शिकायतकर्ता सुल्तान सिंह ने कहा कि वे इस जांच से संतुष्ट नहीं हैं। उनकी मांग है कि इस मामले की जांच विजिलेंस से करवाई जाए। जांच अधिकारी ने कई बिंदुओं पर कार्रवाई की सिफारिश के बजाय खुद के विचार थोप दिए हैं।
जांच अधिकारी को ऑपरेटिव सोसायटी के रजिस्ट्रार जितेंद्र कौशिक ने कहा कि जांच में उन्होंने तत्कालीन बैंक प्रबंधक और बिना आदेश के कर्मचारियों को ज्वाइन करवाने वाले बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने, एजेंसी का टेंडर रद्द करने, उसे ब्लैक लिस्ट करने की सिफारिश की है। साथ ही भर्ती किए गए कर्मचारियों के कागजात की जांच कर उन्हें कौशल विकास निगम में पंजीकृत करवाने की सिफारिश की है।