संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत/कैथल। पिंजुपुरा के पास कलायत माइनर टूटने से किसानों की करीब 70 एकड़ गेहूं की फसल जलमग्न हो गई। सूचना के बाद भी सिंचाई विभाग का कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। इस कारण किसानों में विभाग अधिकारियों के खिलाफ भारी रोष है। खेतों में घुटनों घुटनों तक पानी जमा होने से किसान तनाव में हैं।
घटना से नाराज किसानों दिलबाग, राजेश, बबलू, सलीम ने बताया कि सोमवार मंगलवार रात्रि उन्हें माइनर टूटने की जानकारी मिली। खेतों में पहुंचे तो देखा कि सरसा ब्रांच के नहर के नजदीक कलायत माइनर कई जगह से ओवरफ्लो होकर टूट गया था। पानी उनके खेतों में जमा हो रहा था।
उन्होंने सिंचाई विभाग अधिकारियों को माइनर टूटने की सूचना दी लेकिन कोई भी सक्षम अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। काफी समय के बाद एक कर्मचारी पहुंचा लेकिन उसके पास भी पानी को रोकने के कोई संसाधन नहीं थे।
किसानों का कहना है कि इन हालातों में उन्होंने अपने स्तर पर पानी रोकने का भरसक प्रयास किया लेकिन पानी का बहाव ज्यादा होने के कारण रोक नहीं पाए। किसानों का कहना है कि अगर खेतों से जल्द पानी की निकासी न कराई गई तो फसल खराब हो सकती है।
किसान राजू व दिलबाग ने बताया कि उन्होंने करीब 75 हजार प्रति एकड़ की दर से खेत ठेके लिया है। पहले कुछ दिन पहले ओले और बरसात में काफी फसल खराब हुई। अब माइनर टूटने से पानी जमा होने के कारण पूरी तरह से फसल बर्बाद होने की कगार पर पहुंच गई है।
पीडि़त किसानों ने प्रशासन से मुआवजे की मांग की है। दूसरी ओर नहर विभाग एसडीओ अखिल कौशिक ने बताया कि गांव शिमला के ग्रामीणों द्वारा तालाबों के लिए पानी की डिमांड की गई थी इसलिए माइनर में पानी छोड़ा गया था। माइनर टूटने की सूचना मिलते ही कर्मचारी मौके पर पहुंचे थे। माइनर की मरम्मत कर बंद कर दिया गया है।